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विश्व पर्यावरण दविस पर विशेष:

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Sun, 04 Jun 2017 11:07 PM IST
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लगातार गिर रहा है श्यामलाताल झील का जल स्तर
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चंपावत। जिले में टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ने वाले सूखीढांग क्षेत्र में स्थित एकमात्र श्यामलाताल झील अपनी सुंदरता से सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देती है। गर्मी के दिनों में इस झील का आनंद उठाने दूरदराज से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। लेकिन इस झील का जल स्तर लगातार गिर रहा है। इससे इसकी खूबसूरती खत्म होती जा रही है। पर्यटन विभाग हो या सिंचाई अथवा वन विभाग कोई भी इस झील के लगातार गिर रहे जल स्तर को लेकर संजीदा नहीं है। वर्ष 2000 के बाद से ही झील का जल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। बीते डेढ़ दशक में झील के जल स्तर में दस मीटर की गिरावट आई है।
चंपावत जिले के टनकपुर से करीब 25 किमी दूरी पर स्थित श्यामलाताल में रामकृष्ण मिशन की ओर से स्वामी विवेकानंद आश्रम की स्थापना की गई है। आश्रम के करीब डेढ़ किमी लंबी तथा दो सौ मीटर चौड़ाई की श्यामलाताल झील स्थित है। अद्भुद प्राकृतिक सौंदर्यता से भरपूर इस झील को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की शासन प्रशासन ओर से ठोस पहल न की गई है। झील के सौंदर्य का आनंद लेने आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम नहीं है। गर्मी के दिनों में स्थानीय लोग सैर सपाटे के लिए परिवार के साथ झील का रुख करते हैं। बाहरी क्षेत्रों के पर्यटकों, बंगाली पर्यटकों की यहां अधिक आवाजाही रहती है।
झील के संरक्षण को लेकर सरकारी विभागों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। चारों ओर से सघन वनों से घिरे होने के बाद भी झील के कैचमेंट एरिया में पानी के स्रोतों के सहेजने के कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।

कभी जैव विविधता से भरपूर थी श्यामलाताल झील
चंपावत। वर्तमान में रसातल में पहुंचती जा रही श्यामलाताल की कुदरती झील कभी जैव विविधता से भरपूर थी। क्षेत्र के निवासी शंकर दत्त जोशी, बंशीधर गहतोड़ी, महेश चौड़ाकोटी, प्रकाश सिंह आदि ने बताया कि दो दशक पूर्व तक पर्यटक झील के काले पानी को देखने के लिए बड़ी संख्या में यहां पहुंचते थे। समुद्र तल से 1500 मीटर की ऊंचाई में पहाड़ की चोटी में झील का होना यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को चौंका देता था। पूर्व में यहां मछलियां पकड़ना लोकप्रिय गतिविधियों में शामिल होता था। लेकिन साल दर साल झील के जल स्तर में गिरावट आने से अब झील छिछली हो गई है तथा मत्स्य प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं।

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