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माणा गांव में सरस्वती मंदिर के संचालन पर विवाद

Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 11:06 PM IST
सार

इस संबंध में महिला मंगल दल माणा की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों ने एसडीएम जोशीमठ को भी ज्ञापन सौंपा।वर्ष 2009 में महाराष्ट्र के विश्वधर्मी डा. विश्वनाथ कराड़ तीर्थयात्रा पर माणा गांव भी गए थे और सरस्वती नदी के किनारे स्थित सरस्वती मंदिर के जीर्णोद्धार और देखरेख करने का संकल्प लिया। मंदिर में मां सरस्वती की प्रतिमा के साथ ही कई अन्य मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं। ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि डा. विश्वनाथ कराड़ ने मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया था लेकिन अब मंदिर का संचालन भी उन्हीं की ओर से किया जा रहा है जबकि मंदिर के हक-हकूकधारी माणा गांव के ग्रामीण हैं।

Controversy over operation of Saraswati temple in Mana village
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विस्तार

देश के अंतिम गांव माणा में सरस्वती नदी के किनारे निर्मित सरस्वती मंदिर के मंडप में स्थापित मूर्तियों और इसके संचालन पर विवाद खड़ा हो गया है। माणा गांव के ग्रामीणों ने कहा कि मंदिर का संचालन महाराष्ट्र के एक डॉक्टर की ओर से किया जा रहा है जो गलत है। उन्होंने मंदिर का रखरखाव और संचालन का जिम्मा ग्राम पंचायत को देने की मांग की। इस संबंध में महिला मंगल दल माणा की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों ने एसडीएम जोशीमठ को भी ज्ञापन सौंपा।

वर्ष 2009 में महाराष्ट्र के विश्वधर्मी डा. विश्वनाथ कराड़ तीर्थयात्रा पर माणा गांव भी गए थे और सरस्वती नदी के किनारे स्थित सरस्वती मंदिर के जीर्णोद्धार और देखरेख करने का संकल्प लिया। गत वर्ष मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। मंदिर में मां सरस्वती की प्रतिमा के साथ ही कई अन्य मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं। बताया जा रहा है कि मंदिर के संचालन का जिम्मा डा. कराड़ ही संभाल रहे हैं। ऐसे में माणा गांव के ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं। ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि डा. विश्वनाथ कराड़ ने मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया था लेकिन अब मंदिर का संचालन भी उन्हीं की ओर से किया जा रहा है जबकि मंदिर के हक-हकूकधारी माणा गांव के ग्रामीण हैं। वहीं माणा गांव की महिला मंगल दल अध्यक्ष माहेश्वरी देवी, दमयंती, बीना, कमला आदि ने मंदिर में सरस्वती माता के अलावा कोई भी अन्य मूर्तियां स्थापित न करने की मांग की। उन्होंने इस संबंध में एसडीएम जोशीमठ से हस्तक्षेप की मांग की।

फैलाई जा रही गलतफहमी
- महाराष्ट्र के विश्वधर्मी डा. विश्वनाथ कराड़ का कहना है कि सरस्वती मंदिर की पूजा और मूर्तियों को लेकर कुछ लोगों की ओर से गलतफहमी फैलाई जा रही है। विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए इस मंदिर का भव्य निर्माण किया गया है। यहां जो भी मूर्तियां हैं, वे पहले से ही स्थापित हैं। सरस्वती मंदिर में भारतीय संस्कृति के साथ ही ज्ञान, विज्ञान की पूजा होती है। ग्रामीणों से वार्ता की जाएगी।

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