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रविवार रात अंधेरे में डूबी रही बदरीश पुरी

ब्यूरो/अमर उजाला, गोपेश्वर Updated Mon, 22 May 2017 09:45 PM IST
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बदरीनाथ से लौटकर प्रमोद सेमवाल 
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गोपेश्वर।
बदरीनाथ : शाम साढ़े सात बजे धाम की बिजली अचानक गुल हो गई। इससे मंदिर परिसर के अलावा संपूर्ण बदरीशपुरी अंधेरे में डूब गई। तीर्थयात्रियों के वाहनों का देव दर्शनी से बस अड्डे तक रैला उमड़ा हुआ था। धाम में रात नौ बजे तक करीब 32,000 तीर्थयात्री पहुंचे हुए थे। धाम में सभी होटल फुल हो गए थे। थकान से चूर उन सैकड़ों तीर्थयात्रियों को जब होटलों में कमरे नहीं मिले तो वे होटलों के बरामदे, सड़क किनारे और बस अड्डे के टिन शेड में ही सो गए। 

रात नौ बजे जब बदरीनाथ धाम के दर्शन को तीर्थयात्रियों की लाइन बेकाबू होने लगी तो पुलिस के जवानों ने तीर्थयात्रियों को अपने-अपने कमरों में चले जाने के लिए खदेड़ना शुरू कर दिया, जिसका यात्रियों ने जोरदार विरोध किया। यात्रियों ने सुबह तक लाइन में ही जागरण करने का एलान किया। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ बीडी सिंह ने रात ग्यारह बजे तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए करीब साढ़े चार सौ तीर्थयात्रियों को गुजराती भवन के हॉल में ठहराया।


कुछ तीर्थयात्रियों ने बस अड्डे के टिनशेडों में शरण ली, जबकि कुछ यात्री होटल के लिए माणा गांव पहुंच गए, लेकिन यहां भी उन्हें मायूसी हाथ लगी। माणा रोड पर प्रवचन के लिए लगाए जा रहे पांडाल में करीब अस्सी तीर्थयात्रियों ने शरण ली। होटल न मिलने और बिजली न होने के कारण तीर्थयात्री रातभर अफरा-तफरी में रहे। जो तीर्थयात्री रात ग्यारह बजे तक भी बदरीनाथ पहुंच रहे थे, वे  पुलिस थाने से लेकर बदरीनाथ मंदिर तक टॉर्च और मोबाइल के उजाले में एक दूसरे का हाथ पकड़ कर जा रहे थे। सोमवार को सुबह साढ़े दस बजे यहां विद्युत आपूर्ति सुचारु हो पाई। 

गुजरात की तीर्थयात्री भावना और औरंगाबाद की प्रिया का कहना है कि वे रात दस बजे बदरीनाथ पहुंचीं। कहीं ठहरने के लिए कमरे नहीं मिले। तब मंदिर परिसर में रात काटी। उनका कहना है कि जोशीमठ और पांडुकेश्वर में गेट सिस्टम किया जाना चाहिए ताकि धाम में सीमित तीर्थयात्री आएं और व्यवस्था बनी रहे।

वहीं, बदरीनाथ हाईवे पर सोमवार को भी जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रही। हाथी पर्वत भूस्खलन क्षेत्र में बीआरओ की ओर से रविवार रात को हाईवे का समतलीकरण कार्य किया गया, जिससे सोमवार को यहां पर जाम की स्थिति नहीं हुई, जबकि जोशीमठ में द्रोणागिरि होटल के सामने से लेकर सेलंग तक वाहनों का बार-बार जाम लगता रहा।

बदरीनाथ के लिए फिर शुरू हो गेट सिस्टम
जोशीमठ (ब्यूरो)।
बदरीनाथ धाम में व्यवस्थाओं को काबू रखने के लिए करीब छह साल पहले बंद हो चुके गेट सिस्टम को फिर से बहाल करने की मांग उठने लगी है। वर्ष 2011 से पहले तक  बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा को सुव्यवस्थित और सुचारु रखने के लिए जोशीमठ, पांडुके श्वर में गेट सिस्टम होता था, लेकिन वर्ष 2011 में गेट सिस्टम को खत्म कर दिया गया। इस सिस्टम के बंद होने से बदरीनाथ में यात्रा व्यवस्था बेकाबू हो गई है।

जोशीमठ में होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश रंजन भिलंगवाल का कहना है कि तीर्थयात्रियों को जोशीमठ से बदरीनाथ के लिए शाम सात बजे के बाद जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। जबकि, बदरीनाथ में देर रात तक भी यात्रा वाहनों को जाने दिया जा रहा है। इससे यात्रा व्यवस्था चरमरा रही है।

होटल व्यवसायी रमेश सती कहते हैं कि जोशीमठ से आगे बदरीनाथ हाईवे की स्थिति अभी ठीक नहीं है। यात्रा वाहन जगह-जगह फंस रहे हैं। जोशीमठ में गेट सिस्टम शुरू होना चाहिए। 

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