यहां तो शिक्षा की बुनियाद ही खोखली

Chamoli Updated Sun, 26 Jan 2014 05:48 AM IST
कर्णप्रयाग। सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का लगातार मोहभंग हो रहा है। केवल चमोली जिले की ही बात करें तो यहां 44 बेसिक स्कूल ऐसे हैं, जहां कक्षा एक में छात्र संख्या शून्य है। 60 स्कूलों में कक्षा दो में भी यही स्थिति है। पिछले सत्र की तुलना में जिले में इस बार एक हजार से अधिक छात्र कम हुए हैं।
शिक्षण सत्र 2013/14 में जनपद में 44 स्कूल ऐसे हैं, जहां कक्षा एक में एक भी छात्र का प्रवेश नहीं हुआ है। 60 स्कूलों में कक्षा दो में भी छात्र संख्या शून्य है। 50 से अधिक स्कूलों में दस से कम छात्र हैं। बीते शिक्षण सत्र 2012/13 में जहां जिले के बेसिक स्कूलों में 26516 छात्र-छात्राएं थे, वहीं इस बार यह संख्या घटकर 25288 रह गई है। एक सत्र में ही छात्र संख्या में 1228 की कमी शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों की मानें तो सरकारी स्कूलों में योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होना और जरूरी सुविधाओं की कमी भी घटती छात्र संख्या का कारण है।

इनका कहना है --
आरटीई में पब्लिक स्कूलों में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों के प्रवेश की बाध्यता ने सरकारी स्कूलों की छात्र संख्या को प्रभावित किया है। शिक्षकों की कमी और अन्य मामलों में विभागीय स्तर पर बरती जा रही लापरवाही भी प्रमुख कारण है। - बीना भंडारी जिलाध्यक्ष राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ चमोली

सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या चिंता का कारण है, इस पर मनन करने की जरूरत है। कई तकनीकी कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसमें सुधार के लिए व्यवहारिक स्तर पर कार्य करने की जरूरत है। - अशोक गुसाई जिला शिक्षाधिकारी बेसिक चमोली



आठवीं के बाद पढ़ाई के लिए कठिनाई
हाईस्कूल के लिए जाना पड़ता है 40 से 80 किमी दूर मोरी और पुरोला
- दो वर्ष पहले उच्चीकृत स्कूलों में नहीं भेजे शिक्षक
- लड़कियों के सामने आगे पढ़ने की ज्यादा दिक्कत
रविंद्र थलवाल
उत्तरकाशी। मोरी प्रखंड के कई गांवों में आठवीं के बाद बच्चों की पढ़ाई की राह आसान नहीं हैं। दो वर्ष पहले रमसा के तहत दो स्कूल हाईस्कूल में उच्चीकृत तो किया गया, लेकिन शिक्षकों की तैनाती न होने से छात्रों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अधिकतर बच्चे आठवीं के बाद स्कूल छोड़ने को मजबूर हैं।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जूनियर हाईस्कूल गंगाड़ एवं फिताड़ी को 2009-10 में हाईस्कूल बने थे। दोनों स्कूलों में शिक्षकों के पांच-पांच पद भी स्वीकृत हैं। लेकिन शिक्षक नियुक्त न होने से वहां अब तक कक्षाएं संचालित नहीं हुई है। ऐसे में फिताड़ी, ताछला, रेकचा, राला, गंगाड, ओसला, ढाटमीर जैसे गांवों के छात्र-छात्राओं को आठवीं के बाद ही पढ़ाई के लिए परेशानियां झेलनी पड़ रही है। दो सौ से अधिक बच्चे ब्लाक मुख्यालय मोरी एवं पुरोला में किराया का कमरा लेकर आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि छात्राएं इससे आगे नहीं पढ़ पा रही हैं।
शुरू नहीं हुआ भवनों का काम
दो साल पहले उच्चीकृत गंगाड एवं फिताडी में भवन स्वीकृत भी हैं। भवनों के निर्माण के लिए शिक्षा के माध्यम से कार्यदायी संस्था को पचास फीसदी धनराशि भी ट्रांसफर कर दी हैं, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
कोट.....
उच्चीकृत स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती न होने से पचास फीसदी बच्चेे आठवीं के बाद स्कूल छोड़ने को मजबूर हैं। शिक्षकाें की तैनाती के लिए कई बार मांग करने के बाद भी नियुक्ति नहीं हो पाई। ऐसे में उच्चीकरण के बाद भी छात्रों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। - बलवीर राणा, निवासी फिताड़ी गांव।
कोट....
शिक्षकों की कमी से मोरी के उच्चीकृत स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती नहीं हो पाई। इस सत्र से दोनों स्कूलों में हर हाल में शिक्षक भेजकर कक्षाओं का संचालन शुरू किया जाएगा। - रघुनाथ आर्य, मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी

लॉ कालेज में भी प्राचार्य और प्रवक्ता नहीं
गोपेश्वर। सूबे के एकमात्र सरकारी लॉ कालेज में प्राचार्य और प्रवक्ता नहीं हैं। जिला बार एसोसिएशन ने शनिवार को यहां पहुंचे प्रभारी मंत्री प्रीतम सिंह पंवार से लॉ कालेज में प्राचार्य और प्रवक्ताओं की नियुक्ति की मांग की है। शासन की अनदेखी से कालेज वर्ष 2009 से 2012 तक बंद रहा। बाद में लोगों की मांग पर कालेज वर्ष 2012 में खोला गया, लेकिन सृजित पदों के सापेक्ष शिक्षक- कर्मचारी न होने से कालेज की संबद्धता खत्म होने की कगार पर है। प्रभारी मंत्री से मिलने वालों में एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भूपाल सिंह रावत, सचिव ज्ञानेंद्र खंतवाल, नंदन सिंह बिष्ट, राजू लाल, सुलभ सिंह कंडेरी, मदन मिश्रा, राजेंद्र सिंह नेगी आदि मौजूद थे।

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