नौंवी सदी का मंदिर समूह पर्यटन के नक्शे में नहीं

Chamoli Updated Wed, 22 Jan 2014 05:47 AM IST
कर्णप्रयाग। चौदह मंदिर समूह के रूप में नौंवी सदी में स्थापित श्रीआदिबदरी धाम राज्य बनने के बाद भी पर्यटन नक्शे में स्थान नहीं बना पाया है। बदरिकाश्रमों (पंच बदरी) में प्रथम श्रीआदिबदरी धाम उपेक्षा का दंश झेल रहा है।
कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे पर स्थित पौराणिक धाम को भगवान ऋषि नारायण की तपस्थली भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार ऋषि नारायण ने अपने आश्रमों की शुरुआत यहीं से की थी। बाद में उन्होंने ध्यान बदरी, योग बदरी, भविष्य बदरी, वृद्ध बदरी, और विशाल बदरी (वर्तमान बदरीनाथ) की स्थापना की। श्री आदिबदरी धाम में स्थित 16 मंदिर समूह (अब 14) के निर्माण का ठीक-ठीक पता नहीं है। परिसर में भगवान गरुड़ मंदिर के नीचे शिलापट पर ब्रह्मी लिपि में मंदिरों का निर्माण संवत 900 में शकून नामक कारीगर द्वारा होना लिखा है। इतिहासकार व पुरातत्वविद् इन रथाकार शैली में निर्मित प्राचीन मंदिरों का निर्माण छठवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच बताते हैं। यहां अन्नपूर्णा, सूर्य, सत्यनारायण, गणेश पारब्रह्म, शिव, दुर्गा और जानकी देवी के मंदिर भी हैं।

इंसेट
चार खंड़ों को जोड़कर बनी मूर्ति
आदिबदरी नाथ की अभयमुद्रा में मूर्ति शिल्पकला का अद्भुत नमूना है। काले पत्थर पर तीन फीट ऊंची यह मूर्ति चार खंड़ों को जोड़कर बनाई गई है, जो त्रिविकम चतुर्भुज रूप में अन्य मूर्तियों से अलग है। खड़ी अवस्था में भगवान की इस मूर्ति के दायें हाथ में कमल का फूल नहीं है। मूर्ति के वक्ष पर मां लक्ष्मी का प्रतीक श्रीवत्स अंकित है। मूर्ति के बाहर अन्य 79 उप मूर्तियां उकेरी गई है।

चोरों की नजरों में भी रहीं मूर्ति
श्री आदिबदरी नाथ की मूर्ति वर्ष 1965, 66 और 67 में चोरी हुई थी। 30 जून 1967 की रात को मुख्य मूर्ति के चोरों को पुलिस ने कर्णप्रयाग के निकट पकड़ा था। वर्ष 1967 से अप्रैल 1984 तक यह मूर्ति न्यायिक देखरेख में रही। 1 मई 1984 को मूर्ति को पुन: श्री आदिबदरी धाम लाया गया। यहां 14 से 21 जनवरी 1986 में मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह मनाया गया, जो कि उक्त तिथि पर प्रतिवर्ष मनाया जाता है। मंदिर के कपाट वर्षभर में सिर्फ पौष माह में ही बंद रहते हैं।

कोट-
आदिबदरी में चमोली का सबसे बड़ा मंदिर समूह है, जो सरकारी उपेक्षा से पर्यटन से वंचित है। आपदा के बाद चार धाम यात्रा के बंद होने पर दक्षिण भारत के हजारों यात्रियों ने यहां दर्शन किए थे। मंदिर को बारामासी पर्यटन से जोड़ने को एक चुनौती के रूप में लिया है। मुख्यमंत्री व पर्यटन मंत्री से वार्ता की जाएगी। - वृजयेश नवानी अध्यक्ष श्रीआदिबदरी मंदिर समिति

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