प्रबंधक निदेशक का गांव पानी के लिए हुआ खाली

Chamoli Updated Sat, 28 Sep 2013 05:39 AM IST
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कर्णप्रयाग। पुनर्गठन के चार वर्ष से अधिक समय बाद भी नाकोट-बरसाली पेयजल योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है। हैरत यह है कि इस योजना का लाभ उमट्टा ग्राम पंचायत के चमाली मल्ला को भी मिलना था, जो जलनिगम के प्रबंध निदेशक सीएम डिमरी का पैतृक गांव है। लेकिन स्थिति यह है कि यहां रहने वाले तीन परिवारों में दो ने जहां कुछ माह पूर्व अन्यत्र पलायन कर लिया है, वहीं यहां रह रहा एकमात्र परिवार भी आपदा के बाद से मुख्य गांव उमट्टा आ गया है। बीना डिमरी कहती हैं कि करीब डेढ़ किमी दूर से पानी जुटाना मुश्किल था। बरसात के बाद से तो ऊपर पहाड़ी से पत्थर गिर रहे थे, जहां रहना खतरे से खाली नहीं है। वे चमाली मल्ला से तीनों परिवारों के पलायन का कारण पेयजल समस्या को मानती है। ग्राम प्रधान अरविंद चौहान कहते हैं कि ग्राम पंचायत के चमाली मल्ला से सीएम डिमरी व चमाली तल्ला से डीडी डिमरी दोनों जलसंस्थान और जल निगम में उच्च पदों पर है। लेकिन क्षेत्र पानी के लिए तरस रहा है।
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