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अफसर गांव तो आए, पर काम न आए

Chamoli Updated Thu, 08 Aug 2013 05:35 AM IST
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गोपेश्वर। थिरपाक गांव के लोगों ने आपदा राहत सामग्री नहीं मिलने पर बुधवार को प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कहा कि उनके भवन रहने लायक नहीं रह गए हैं। 24 जुलाई को सुनाली में बादल फटने के बाद से वे खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। प्रशासन ने उन्हें टेंट तक मुहैया नहीं कराया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा।
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प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा मुखर होकर सामने आया। उन्होंने जिलाधिकारी को प्रभावितों ने शीघ्र टेंट, तिरपाल और सोलर लालटेन देने की मांग की। ग्रामीण तेजवीर कंडेरी ने कहा कि बादल फटने के बाद अधिकारी-कर्मचारी थिरपाक गांव में तो आए, पर सिर्फ टेंट, तिरपाल का आश्वासन देकर चले गए। आपदा के दो सप्ताह बीत जाने पर भी ग्रामीणों को राहत सामग्री नहीं दी गई है, जबकि गांव में 140 भवन भूस्खलन की जद में आ गए हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीण हल्की बारिश में भी घर छोड़कर अन्यत्र सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। कई प्रभावित अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं। प्रदर्शनकारियों में प्रधान नरेंद्र सिंह, ललिता देवी, वीरेंद्र सिंह रावत, दिनेश, उमेद सिंह, शकुंतला देवी, पुष्पा देवी, लक्ष्मी, बसंती, संकरी देवी, सुंदरी देवी, देवेश्वरी, बीना आदि शामिल थे।

गोशालाओं में रह रहे लोग
कर्णप्रयाग। आपदा से तहसील का थिरपाक जिला पंचायत वार्ड त्रस्त है। बादल फटने के 12 दिन बाद भी जनजीवन पटरी पर नहीं उतरा है। गांवों में जहां पेयजल समस्या बनी है। लोग गोशालाओं और रिश्तेदारों के घर जीवन यापन कर रहे हैं।
थिरपाक वार्ड के तेफना, सुनाली, बांतोली, जैटी, कंडारा, हिंडोली, नौली, कोटी, चंटग्याला, सैंज, सिलंगी, डोठंला, स्वर्का, धल, मैखुरा, बणसोली, स्यान, सेरागाड़ सहित 16 ग्राम पंचायतों के तीन दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हैं। गांवों का भ्रमण कर लौटे भाजपा के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष रमेश मैखुरी ने कहा कि वार्ड पूरा प्रभावित हुआ है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। दूसरी ओर, उपजिलाधिकारी राहुल गोयल ने कहा कि थिरपाक वार्ड के कई गांवों में क्षतिग्रस्त हुए भवनों का मुआवजा दे दिया गया है और अन्य का निरीक्षण जारी है। स्टॉफ की कमी से समस्या हो रही है।

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