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चांदपुर गढ़ी से हिमालय को विदा होंगी मां

Chamoli Updated Wed, 13 Feb 2013 05:31 AM IST
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विनय बहुगुणा
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कर्णप्रयाग। अगस्त-सितंबर में होने वाली श्रीनंदा राजजात में इस बार टिहरी नरेश और टिहरी सांसद चांदपुर गढ़ी में आराध्य देवी की पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे। पौराणिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए राजा राजजात में चांदपुर गढ़ी में देवी की पूजा-अर्चना कर उसे हिमालय के लिए विदा करते हैं।
मान्यताओं के अनुसार सातवीं शताब्दी में गढ़वाल के राजा शालीपाल ने राजजात की परंपरा शुरू की थी। मां नंदा को गढ़वाल और कुमाऊं के राजाओं की आराध्य देवी माना जाता है। चांदपुर गढ़ी में राजा ने देवी के मंदिर का निर्माण कर मूर्ति स्थापना की, जिसकी हमेशा पूजा होती थी। 14वीं शताब्दी में राजा अजय पाल ने चांदपुर गढ़ी से राजधानी देवलगढ़ स्थापित कर दी थी। लेकिन मां श्रीनंदा की नियमित पूजा की जिम्मेदारी नौटी के राजगुरु नौटियाल और राजजात की कांसुवा के कुंवरों को सौंपी थी। राजा श्रीनंदा राजजात के समय स्वयं चांदपुर गढ़ी पहुंचकर अपनी आराध्य के दर्शनों और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे। यह परंपरा आज भी चलती आ रही है, जिसका निर्वहन टिहरी के राजा करते आ रहे हैं।

राजजात समिति के अनुसार इस बार अगस्त-सितंबर में होने वाली श्रीनंदा राजजात में टिहरी के राजा मनुजेंद्र टीका शाह और उनकी धर्मपत्नी और टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह और अन्य परिजन भी चांदपुर गढ़ी में पहुंचकर आराध्य देवी मां श्रीनंदा की पूजा-अर्चना करेंगे। दूसरी तरफ देवाल के नंदकेशरी में कुमाऊं के राजा और नैनीताल सांसद केसी सिंह बाबा देवी की पूजा करेंगे।
इंसेट
वर्ष 1968 की राजजात में राजा मानवेंद्र शाह ने चांदपुर गढ़ी में मां नंदा की पूजा की।
1987 में राजा के अनुज शारदुल विक्रम शाह ने पूजा की।
2000 में टिहरी राजा नहीं पहुंच पाए।
2013 में मनुजेंद्र शाह और राज्य लक्ष्मी शाह पूजा-अर्चना करेंगे।
75 वर्ष के बाद कुमाऊं से देवी की डोली वर्ष 2000 की राजजात में शामिल हुई थी। उस समय नंदकेशरी में कुमाऊं के राजवंशी सांसद केसी बाबा ने पूजा की थी।
इनका कहना है
राजजात में राजा की भूमिका अहम होती है। अपनी आराध्य के दर्शनों और उसकी पूजा के लिए चांदपुर गढ़ी में स्वयं राजा पहुंचते हैं। इस वर्ष राजा और टिहरी सांसद चांदपुर गढ़ी में मां श्रीनंदा के दर्शनों के साथ ही पूजा-अर्चना के लिए आएंगे। दिनपट्टा घोषित होने के बाद राजजात समिति की ओर से उन्हें लिखित न्यौता भी दिया जाएगा। टिहरी के राजा और रानी के साथ उनके अन्य परिजन भी इस धार्मिक अनुष्ठान में शिरकत करेंगे।
- डा. राकेश कुंवर कार्यकारी अध्यक्ष/भुवन नौटियाल, महामंत्री राजजात समिति

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