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नौनिहालों के साथ मजाक नहीं तो और क्या

Chamoli Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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गोपेश्वर। चमोली जनपद के अधिकांश गोदामों में पिछले तीन माह से मध्याह्न भोजन योजना के चावलों की आपूर्ति नहीं हो पाई है। विद्यालयों में सरकार की यह व्यवस्था चरमरा गई है। जनपद में अक्तूबर से दिसंबर माह तक करीब 50 क्विंटल चावल प्राप्त नहीं हो पाया है।
चमोली जनपद के 416 प्राथमिक और 991 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 50 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। प्राथमिक विद्यालयों के लिए अक्तूबर माह में 638 क्विंटल के सापेक्ष 223.56, नवंबर माह में 546.90 के सापेक्ष 184.20 क्विंटल चावल कम प्राप्त हुआ। ऐसे ही उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अक्तूबर माह में 658.20 के सापेक्ष 102.04 और नवंबर माह में 564.10 के सापेक्ष 120.30 क्विंटल चावल कम प्राप्त हुआ। निजमुला घाटी में चावल न पहुंचने से मध्याह्न भोजन योजना प्रभावित हो रही है।

आखिर कौन बोल रहा सच
जिला पूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी ग्रेन डीलरों को प्रतिमाह चावल वितरित किए जा रहे हैं, जबकि ग्रेन डीलरों का कहना है कि उन्हें पिछले तीन माह से मध्याह्न भोजन की एक बोरी चावल तक नहीं मिली है। इसी वजह से विद्यालयों में चावल नहीं भेज पा रहे हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर कौन सच बोल रहा है।
निजमुला घाटी में आपदा से रास्ते क्षतिग्रस्त पडे़ हैं, जिससे वहां मध्याह्न भोजन का चावल नहीं भेजा जा सका है। अन्य जगहों के विद्यालयों में चावल भिजवाने की व्यवस्था की हुई है। यह देखेंगे कि कहां चावल नहीं पहुंच रहा है।-श्याम लाल आर्य, डीएसओ, चमोली।


ऐसे तो संवर गया छात्रों का भविष्य
30 इंटर कालेज में कई वर्षों से नहीं हैं गणित, विज्ञान के शिक्षक
गोपेश्वर। जहां सरकार एक ओर विद्यालय प्रबंधन को शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कडे़ फरमान जारी कर रही है, वहीं विद्यालयों में महत्वपूर्ण विषयों में पद कई वर्षों से रिक्त पडे़ हैं। इन जगहों पर कामचलाऊ ढंग से व्यवस्था की जा रही है।
चमोली जनपद में वर्तमान में 98 राजकीय विद्यालय इंटर स्तर के हैं। इनमें से 30 विद्यालय ऐसे हैं, जिसमें विज्ञान और गणित जैसे महत्वपूर्ण शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं। जीआईसी गोपेश्वर, अल्कापुरी, टंगसा, गोदली, रडुवा, चौंडी, नागनाथ, उडामांडा, थालाबैंड़, बूरा, बांजबगड़, कांडई, मोख, पीपलकोटी, जोशीमठ, उर्गम, घिंघराण आदि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
शिक्षकों की कमी गंभीर समस्या तो है, लेकिन पठन-पाठन कार्य प्रभावित न हो इसके लिए जूनियर विद्यालयों के शिक्षकों से काम लिया जा रहा है। शिक्षकों के पदों को भरने के लिए शासन से भी पत्राचार चल रहा है। जैसे ही शिक्षक मिल जाएंगे, विद्यालयों में भेज दिए जाएंगे। बीएस नेगी, सीईओ, चमोली।

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