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सर्द रात में संतान के लिए ‘बरोहियों’ का तप

Chamoli Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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गोपेश्वर। दतात्रेय जयंती पर लगने वाला दो दिवसीय सती माता अनुसूया का मेला बृहस्पतिवार से शुरू हो गया। अनुसूया माता को पुत्र दायिनी माना जाता है। संतान प्राप्ति की कामना के साथ करीब 350 बरोही (निसंतान दंपति) यहां पहुंच गए हैं। साथ ही मंडल घाटी की देव डोलियां भी अनुसूया माता मंदिर के लिए प्रस्थान कर चुकी हैं। खल्ला, बणद्वारा, देवलधार, कठूड़ और सगर गांवों से मंडल में पहुंची देव डोलियों के मिलन को करीब से देखने के लिए यहां देवी भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा।
मेले का शुभारंभ बीस सूत्री कार्यक्रम कियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष और बदरीनाथ विधायक राजेंद्र भंडारी ने किया। उन्होंने कहा कि अनुसूया माता मेले को नया स्वरूप दिया जाएगा। अपराह्न तीन बजे अनुसूया गेट पर पांचों देव डोलियों के मिलन के पश्चात डोलियों ने ढोल-दमाऊ और वैदिक मंत्रोचार के साथ मुख्य मंदिर के लिए रवाना किया गया। देव-डोलियों के साथ सैकड़ों की संख्या में देवी भक्त भी अनुसूया मंदिर पहुंच रहे हैं। अनुसूया मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंवर सिंह नेगी ने कहा कि मंदिर में रातभर सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। देवी भक्त रात्रि जागरण करेंगे।



माता अनुसूया पुत्र दायिनी हैं। हम यहां पुत्र कामना लेकर आए हैं। माता की ख्याति विश्व में फैली है। हम माता से आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं।
गोविंद, सविता चौधरी, देहरादून, डाक पत्थर निवासी।

हमारी शादी आठ साल पूर्व हुई थी। अभी हमें पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई है। माता अनुसूया से पुत्र कामना के लिए आए हैं। हम माता से आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं। सुमन, विश्वजीत, दिल्ली निवासी।


यहां है मंदिर
माता अनुसूया का मंदिर समुद्र तल से 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। जिला मुख्यालय गोपेश्वर से गोपेश्वर-मंडल मोटर मार्ग पर 13 किमी की दूरी पर मंडल बाजार स्थित है। यहां से पांच किमी की पैदल दूरी तय कर अमृत गंगा के दक्षिण भाग में ऋष्यकुल पर्वत की तलहटी में मंदिर स्थित है। यहां से करीब दो किमी की दूरी पर ब्रह्मा जी के मानस पुत्र अत्रि ऋषि का आश्रम स्थित है।

यह है मान्यता-
श्रीनगर गढ़वाल में स्थित प्रसिद्ध कमलेश्वर मंदिर में जहां, बैकुंठ चतुर्दशी पर दंपति पुत्र कामना के लिए रातभर खडे़ दिए लेकर जागरण करते हैं, वहीं माता अनुसूया मंदिर में बरोहियों को मंदिर प्रांगण में बने एक कक्ष में बैठाया जाता है। मान्यता है कि उन्हें यहां सपने में माता अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं, जिस बरोही को माता दर्शन दे देती है, वह चुपके से उठकर मुख्य मंदिर में पूजा के लिए पहुंच जाती है। मान्यता है कि जिस भी बरोही के स्वप्न में कन्या आएगी। वह अति शुभ फलदायी होगा।

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