ब्रह्ममुहूर्त में पूजा के साथ मां भराड़ी की जात शुरू

Chamoli Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
आदिबदरी। पज्याणा में 29 सालों के बाद रविवार को मां भराड़ी देवी की दस दिवसीय जात शुरू हुई। इस मौके पर सुबह से ही देवी के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही। ब्रह्ममुहूर्त में पंचनाम देवताओं की पूजा-अर्चना शुरू हुई। बजगिरों ने जैसे ही नौबतें (ढोल-दमाऊं वादन) बजाई तो घंडियाल, लाटू, हीत एवं भूमियाल देवता के मानस पुत्र नृत्य करते हुए अवतरित हुए।
नृत्य की अलग-अलग भंगिमाओं के साथ देवता मां भराड़ी देवी के प्रांगण में पहुंचे। यहां पर वेद मंत्रों और वैदिक पूजा के साथ आराध्य हीत देवता के त्रिशूल से मां को चढ़ावे से 29 सालों से एकत्र हुए धान के भंडार (कोठार) को खोला गया। इस मौके पर ग्रामीणों ने टोकरियों की मदद से धान बाहर निकाला और धार्मिक अनुष्ठान के साथ धान को ओखली में कूटा। मंदिर में 24 दिसंबर को कूटे गए छह कुंतल अनाज का भोग तैयार होगा। इसे मंदिर में चढ़ावे के बाद भक्तों को परोसा जाएगा। 25 दिसंबर को गांव में सामूहिक भोग लगेगा।
29 सालों बाद भी साफ है धान
29 सालों के बाद खोले गए भराड़ी देवी के भंडार में रखा धान आज भी ताजा और साफ है। ग्रामीण इसे मां भराड़ी का आशीर्वाद और चमत्कार मान रहे हैं। पज्याणा सहित दूधातोली क्षेत्र के गांवों के ग्रामीण भराड़ी देवी को अपनी आराध्य देवी के रुप में पूजते हैं। पज्याणा गांव में मां भराड़ी देवी का पहला मंदिर है। वहीं इसके बाद देवी कांसुवा के कुंवरों के थान पर भी विराजमान हुईं।
पज्याणा गांव में उत्साह का माहौल
मां भराड़ी देवी की जात को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। गांव में लोगों ने अपने घरों को रंग-रोगन से सजा रखा है और देवी दर्शनों के लिए गांव पहुंच रहे लोगों और उनके रिश्तेदारों का जोरदार स्वागत हो रहा है। गांव में देवी भक्तों के लिए रात्रि विश्राम के लिए पूरी व्यवस्था की गई है।
25 को भराड़ी देवी को लगाएंगे भोग
ज्ञान सिंह नेगी और वचन सिंह नेगी ने बताया कि दस दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान में सुबह, दोपहर, शाम और रात को भी आराध्य देवी का विशेष पूजा अनुष्ठान होगा। संध्या की नौबती के साथ लाटू, भूमियाल, हीत और घंडियाल के आह्वान के साथ वीर एवं सेवकों का नृत्य भी होगा। उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को छिमटा गांव से पजए (मुख्य पुजारी) को गाजे-बाजे के साथ पज्याणा लाया जाएगा, जो 25 दिसंबर को भराड़ी देवी को भोग लगाएंगे।
अन्न भंडार भरने के बाद होती है जात
आदिबदरी। पज्याणा गांव में मां भराड़ी देवी की जात अन्न भंडार (कोठार) के भरने के बाद ही होती है। देवी मंदिर के निकट ही स्थापित इस अन्न भंडार में प्रत्येक वर्ष गांव का प्रत्येक परिवार एक पाथा (दो किलो) नया धान डालता है। जितने वर्षो में यह अन्न भंडार भरता है, उतने ही वर्ष बाद देवी की जात आयोजित की जाती है। बुजुर्ग ज्ञान सिंह नेगी बताते हैं कि यह प्राचीन परंपरा है। मां भराड़ी देवी की जात इससे पूर्व वर्ष 1982-83 में हुई थी।

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