दुर्मी ताल को मिलेगी खोई पहचान

Chamoli Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
गोपेश्वर। चमोली के आधे हिस्से को तहस-नहस करने के बाद बिखरे पडे़ दुर्मी ताल को संवारने की कवायद शुरू हो गई है। ताल का सुंदरीकरण होने से जहां पर्यटकों का सैलाब उमड़ने लगेगा, वहीं ताल में मछली पालन से भी लोगों को रोजगार मिलेगा। बदरीनाथ के विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी कहते हैं कि ताल को स्वरोजगार और पर्यटन से जोड़ा जाएगा। इसके लिए पर्यटन मंत्री से तत्काल धन स्वीकृत कराने की मांग की है।
दुर्मी ताल निजमुला घाटी के दुर्मी गांव में स्थित है। यहां पूर्व में पर्यटक घोडे़-खच्चरों से पहुंचते थे। फिलहाल यहां सड़क बनाई जा रही है। गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज ने दुर्मी ताल के इर्दगिर्द बदहाल पडे़ पैदल ट्रैकिंग रूटों को ठीक करवाने और संचार सेवा मुहैया कराने का वादा किया है। दुर्मी गांव की प्रधान फ्यूंली देवी कहती हैं कि ताल के संरक्षण की कवायद पहली बार हो रही है। यदि सरकार इसके विकास में उदासीनता न बरते तो ताल पर्यटकों से गुलजार रहेगा।
हिला दिया था दुर्मी ताल ने
वर्ष 1971 में भारी बारिश और बादल फटने से दुर्मी ताल फट गया। तब चमोली में जिला मुख्यालय था। ताल का मलबा जिला मुख्यालय के भवनों को अपने साथ बहा ले गया। बिरही में लोगों के खेत-खलियान बह गए थे। इसके बाद जिला मुख्यालय को गोपेश्वर में शिफ्ट कर दिया गया। तब से दुर्मी ताल बिखरा पड़ा है।
क्या है ताल की खासियत
निजमुला घाटी की सुरम्य वादियों के मध्य स्थित दुर्मी ताल का धार्मिक महत्व भी है। मान्यता है कि जब मां पार्वती ने भगवान शिव से इस स्थान पर थोड़ी देर विश्राम करने की इच्छा जताई तो भगवान शिव ने मां पार्वती के आग्रह पर यहां कुछ पल बिताए। इसी दौरान प्यास बुझाने और स्नान के लिए भोले नाथ ने अपनी त्रिशूल से यहां एक तालाब उत्पन्न कर दिया। तभी से इस ताल का नाम दुर्मी ताल पड़ा।
जरूर मिलती क्षेत्र को विश्व मानचित्र पर जगह
यदि ब्रिटिश कालीन शासन कुछ वर्ष और हुकूमत करता तो चमोली जनपद के पर्यटक स्थलों को विश्व मानचित्र पर जगह मिल जाती। अंग्रेजों द्वारा दुर्मी ताल के इर्दगिर्द पहुंचाई गई टेलीफोन लाइनों, यहां पडे़ नावों के अवशेषों और बंगलों को देखकर तो यही लगता है। स्थानीय ग्रामीण मेहरबान सिंह और मोहन सिंह का कहना है कि बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि अंग्रेज एक स्थान पर बैठकर कहां क्या बनाया जाना है, उस पर विचार-विमर्श किया करते थे।
कोट
दुर्मी ताल के संरक्षण की वृहद योजना बनाई जा रही है। प्रयास रहेगा कि इसी से सटे औली और वेदनी बुग्यालों में भी पर्यटकों के लिए सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। दुर्मी ताल को स्थानीय लोगों की आर्थिकी से जोड़ा जाएगा।
- सतपाल महाराज, गढ़वाल सांसद।
फोटो फाइल नेम-08जीओपी01.जेपीजी

Spotlight

Most Read

Unnao

ट्रक में भिड़ी कार, एक की मौत

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर शाहपुर तोंदा गांव के सामने ट्रक के अचानक ब्रेक लेने से पीछे आ रही तेज रफ्तार कार पीछे घुस गई। हादसे में चालक की मौत हो गई। साथी गंभीर रूप से घायल हो गया।

21 जनवरी 2018

Related Videos

बर्फबारी के बीच बद्रीनाथ के कपाट छह महीने के लिए हुए बंद

बद्रीनाथ में बर्फबारी के बीच बद्रीनाथ के कपाट छह महीने के लिए बंद हो गए। यहां हुई बर्फबारी का असर मैदानी इलाके में भी देखने को मिला। इस बर्फबारी से तापमान में गिरावट आ गई है।

19 नवंबर 2017

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper