भारत-तिब्बत सीमा पर आसान हुई सेना की पहुंच

Chamoli Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
प्रमोद सेमवाल
गोपेश्वर। भारत-तिब्बत (चीन) सीमा पर अब भारतीय सैनिकों की पहुंच पहले से आसान हो गई है। सीमा क्षेत्र के अंतिम छोर से 15 किलोमीटर पहले तक सड़क निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। इससे जवानों को वाहनों से एक चौकी से दूसरी चौकी तक पहुंचने में आसानी होगी। सेना की रसद और हथियार भी ट्रकों से सीमा के करीब पहुंचाए जा सकेंगे। पहले, सीमा क्षेत्र के अंतिम गांव मलारी से सीमा के अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए 37 किमी. की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। सड़क रिमखिम तक बननी प्रस्तावित है, इसके बाद सीमा सड़क मार्ग से सिर्फ तीन किमी दूर ही रह जाएगी।
मलारी तिब्बती (चीन) सीमा क्षेत्र का अंतिम गांव है। सैनिकाें को यहां से सुमना तक 25 किमी. की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती थी। इसके बाद तिब्बत से सटे क्षेत्र बाड़ाहोटी बुग्याल तक की 12 किमी. की अतिरिक्त चड़ाई चढ़नी होती थी। लेकिन, अब सड़क बनने से सुमना से तीन किमी. पहले तक सेना के वाहनों की पहुंच हो चुकी है। सुमना तक के शेष तीन किमी. मार्ग का निर्माण भी इसी चरण में तेजी से हो रहा है। जबकि, दूसरे चरण में सुमना से रिमखिम तक के करीब नौ किमी. लंबे मार्ग का निर्माण प्रस्तावित है। यह मार्ग सेना चौकियाें को आपस में मिलाएगा। सीमा का अंतिम छोर बड़ाहोती बुग्याल है, जो रिमखिम से तीन किमी. आगे स्थित है। लेकिन, नो मेंस लेंड होने से फिलहाल इस क्षेत्र को सड़क मार्ग से जोड़ने की योजना नहीं बन पाई है। ऐसे में, रिमखिम तक मार्ग बनने के बाद भी जवानाें को बड़ाहोती तक की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ेगी।
कोट
‘मलारी से गिरथी तक बनेगा डबल लेन‘
जोशीमठ-मलारी मोटर मार्ग से 22 किमी आगे तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसे अभी तीन किमी और आगे सुमना तक बनाया जा रहा है। फिलहाल मलारी से गिरथी तक डबल लेन और यहां से आगे रिमखिम तक सिंगल लेन सड़क निर्माण प्रस्तावित है। समुना तक मार्ग पहुंचने के बाद द्वितीय चरण की कार्य भी जल्द शुरू होगा।
- निलेश चंद्राना, कर्नल, बीआरओ।
भारत-चीन के बीच का विवादास्पद हिस्सा है बाड़ाहोती
गोपेश्वर। ऋषिकेश से बाड़ाहोती 259 किमी की दूरी पर स्थित है। कुछ दिनों बाद यहां तक पहुंचने के लिए 12 किमी की चढ़ाईनुमा पैदल दूरी तय करनी होगी। बाड़ाहोती में भारत-चीन का सीमांत स्थल है और शिव-पार्वती का एक छोटा मंदिर भी बना है। बाड़ाहोती पहुंचने को जोशीमठ से होकर बड़ागांव, सुरांईटोटा, जुम्मा मलारी होते हुए लोअर और अपर रिमखिम पार करना पड़ता है। बाड़ाहोती बुग्याली क्षेत्र है और आईटीबीपी की कई चौकियां स्थापित हैं। जबकि, निचले क्षेत्र में भारतीय सेना की टुकड़ी तैनात है। मलारी गांव के बाद आम लोगाें की आवाजाही बंद है। इस क्षेत्र पर चीन भी अपना दावा ठोकता रहा है। यह संपूर्ण क्षेत्र ढलान एरिया है।

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