मनोकामनाएं पूर्ण करती है मां उमा

Chamoli Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
कर्णप्रयाग। मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली मां उमा के मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। यहां चैत्र और शारदीय नवरात्र में देवी के तीन रूपों की विशेष पूजा की जाती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने भगवान शंकर से विवाह की इच्छा के तहत यहां कन्या रूप में तप किया था। भगवान शंकर ने पार्वती के तप से प्रसन्न होकर उसे उमा नाम दिया। महाकवि कालदीस रचित मेघदूत में इस प्रसंग का वर्णन है। (उमा का शाब्दिक अर्थ मन से तप करना) भगवान शिव को वर के रूप में मांगने वाली उमा अर्थात पार्वती को शंकरी के नाम से भी जाना जाता है। दुर्गा सप्तमी में शंकरी नाम का वर्णन ‘या शंकरी भगवती वृषवा: हनस्था:, ता मोक्ष दाम शिव करे हृदये भयामी’ के रूप में किया गया है।
ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मुख्य बाजार से लगभग दो सौ मीटर की दूरी पर स्थिति मां उमा देवी के मंदिर में वर्षभर श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।

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