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बर्फ का सीना चीरकर सीमा पर डटे ‘हिम वीर’

Chamoli Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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जोशीमठ। चीनी आक्रमण के दौरान जब हिमालय ‘घायल’ अवस्था में पड़ा था। उस वक्त हिमालय की देखरेख और सीमा की सुरक्षा के लिए 24 अक्तूबर 1962 को आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) का उदय हुआ।
भारत-चीन की 3488 किमी. लंबी सीमा की रक्षा का जिम्मा पिछले 50 सालों से आईटीबीपी के हवाले ही है। नीती घाटी की बर्फीली चट्टानों से होकर सीमा पर मुस्तैद इन जवानों ने वर्ष 2011 में एक से दूसरी चौकी तक जाने के लिए बर्फ काटकर करीब 12 किमी लंबी सड़क का निर्माण भी किया। जवानों ने कई बार एवरेस्ट पर्वतारोहण किया और ‘हिम वीर’ की उपाधि पाई।
सीमा के सजग प्रहरी और हिम वीर के रूप में विख्यात आईटीबीपी 13 अक्तूबर से अपनी 50 वीं वर्षगांठ मनाने जा रही है। प्रतिनिधि सेना के उच्च अधिकारी हेलीकॉप्टर से नीती और श्री बदरीनाथ क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। उप सेनानी कुलदीप गुसाईं ने बताया कि सीमांत गांव गमशाली से देहरादून तक साइकलिंग अभियान भी चलाया जा रहा है।

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