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संगठन चुनाव पर भारी पडे़गी नेताओं की मंशा!

Chamoli Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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कर्णप्रयाग। चमोली में भाजपा के सांगठनिक चुनावों में एक बार फिर खलल पड़ने के आसार बन गए हैं। भाजपा संगठन के संविधान में व्यवस्था है कि पर्यवेक्षक चुनाव नहीं लड़ सकता। यहां मामला ऐसा है कि बनाए गए कई पर्यवेक्षक खुद जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हैं। इस कारण अब विभिन्न ब्लाकों में होने वाले मंडल चुनावों की तारीख बदलने की उम्मीद बन रही है। हालांकि मामला सामने आने पर अब जिलाध्यक्ष प्राथमिक समितियों के चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त करने की बात कह बचाव की मुद्रा में हैं।
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चमोली के विभिन्न मंडलों के आठ से 15 अक्तूबर तक चुनाव होने हैं। पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी थी।19 अक्तूबर को जिलाध्यक्ष का चुनाव होना है, लेकिन पर्यवेक्षकों के जिलाध्यक्ष या संगठन में अन्य पद के लिए दावेदारी न करने के नियम की वजह कई पर्यवेक्षक इस जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अधिकतर पर्यवेक्षक जिलाध्यक्ष की दौड़ में शामिल है। हालांकि इस बीच जोशीमठ, देवाल व थराली में मंडलों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं, लेकिन कर्णप्रयाग में ग्राम समितियों के चुनाव पूरे न होने का मामला बताकर फिलहाल टाल दिए गए हैं। वहीं गैरसैंण व पोखरी में स्थिति ठीक नहीं है। इधर भाजपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र डिमरी ने बताया कि मंडलों में नियुक्त पर्यवेक्षक प्राथमिक समितियों के गठन के लिए थे, न कि मंडलों के लिए। हालांकि सर्वसम्मति बनने पर पर्यवेक्षक की आवश्यकता नहीं है। अभी पर्यवेक्षक बदले जा सकते है।

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