ग्रामीण स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर

Chamoli Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
कर्णप्रयाग। गाड़-गदेरों से जुड़ी सरकारी योजनाएं ग्रामीणों के हलक तर करने में नाकाम साबित हो रही हैं। योजनाएं कभी स्रोत पर पानी कम होने, तो कभी आपदा में क्षतिग्रस्त होने की वजह से ठप पड़ी हुई हैं। ग्रामीण दूरस्थ स्रोतों से मवेशियों और अपने लिए पेयजल ढोह रहे हैं।
सेमी-ग्वाड़-कुजासू, सिमली गांव एवं सिमली अनुसूचित जाती बस्ती पेयजल योजना, रतूड़ा-घंडियाल, पंती पेयजल योजना, देवस्थली-वानुड़ी-मुंदोली, उत्तरों पेयजल योजना, देवपुरी-पत्थरकट्टा सहित कई पेयजल योजनाएं हैं, जो बरसात के बाद से क्षतिग्रस्त पड़ी हुई हैं। लेकिन जलसंस्थान एवं जल निगम द्वारा इनकी मरम्मत के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं के क्षतिग्रस्त होने से उन्हें दूरस्थ पेयजल स्रोतों एवं गाड़-गदेरों से पानी ढोना पड़ रहा है। बीडीसी एवं तहसील दिवसों के जरिये विभागों को कई बार अवगत कराने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

बरसात से जनपद में साठ से अधिक पेयजल लाइनों को नुकसान पहुंचा है। विभागीय अधिकारियों के द्वारा मौका निरीक्षण कर अधिकांश के इस्टीमेट उपलब्ध हो चुके हैं, जिन्हें शासन को भेजा जा रहा है।
- एससी जोशी अधिशासी अभियंता जलसंस्थान गोपेश्वर (चमोली)

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