खत्म नहीं हो रहा गैस कनेक्शनों पर संकट

Chamoli Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
कर्णप्रयाग। किसी ने सोचा भी नहीं था कि कभी रसोई गैस कनेक्शन उनके लिए मुसीबत का सबब भी बन जाएंगे। पहले सत्यापन प्रक्रिया में समय और धन जाया करने और फिर दाम वृद्धि के बोझ से दबे उपभोक्ताओं को अब अपने कनेक्शन नजदीकी एजेंसी में ट्रांसफर कराने की एक और मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
दरअसल क्षेत्र में नई एजेंसियां तो खुलीं लेकिन उपभोक्ता पुरानी से ही जुड़े रहे। अब जब सत्यापन प्रक्रिया हुई तो ऐसे हजारों कनेक्शन समस्या बन रहे हैं। मामले में अधिकारी अब कनेक्शनों की ट्रांसफर प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। तहसील मुख्यालय में 1996 में इंडेन गैस ऐजेंसी का शुभारंभ हुआ। इससे पूर्व यहां श्रीनगर और गोपेश्वर से रसोई गैस की आपूर्ति की जाती थी। कर्मियों की मानें तो तब उपभोक्ताओं द्वारा श्रीनगर और गोपेश्वर के कनेक्शनों को ट्रांसफर नहीं किया गया। अभी भी सैकड़ों कनेक्शन श्रीनगर की एजेंसी में बने हुए हैं। 2007 में कर्णप्रयाग से हटाकर थराली में इंडेन एजेंसी की शुरुआत हुई जबकि 2004 में नारायणबगड़ और गैरसैंण में क्रमश: भारत और एचपी की एजेंसी चालू हुई।
सालों बीतने के बाद अभी भी कर्णप्रयाग के पास थराली में 1500, नारायणबगड़ में 200, गैरसैंण में 3000 और नंदप्रयाग के करीब 30 कनेक्शन कर्णप्रयाग से जुड़े हैं लेकिन संबंधित रसोई गैस एजेंसियों ने कनेक्शनों को ट्रासंफर करने की कार्रवाई नहीं की। इस बारे में पूछने पर कर्णप्रयाग के प्रबधंक वाईएस रावत, थराली के जेएस जगवाण ने बताया कि लोगों को ट्रांसफर करने के लिए बताया जा रहा है।


लापरवाही बनी मुसीबत
उपभोक्ताओं की लापरवाही अब मुसीबत बन गयी है। मानकों की बात करें तों नई ऐजेंसी के खुलने पर स्थानीय उपभोक्ताओं को नई एजेंसी से जुड़ना होता है जिसके लिए पुराने कनेक्शन को ट्रांसफर कराना जरूरी है। नियमों के अनुसार पुराने कनेक्शन का रेगुलेटर और सिलेंडर को जमाकर नई एजेंसी से यही चीजें प्राप्त करनी होती हैं लेकिन कई उपभोक्ताओं ने तब पुराने कनेक्शन को जमा करने के बजाय नया ले लिया। जो अब सत्यापन के लिए मुसीबत बन रहा है।

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