पितरों का उद्धार स्थल है पवित्र ब्रह्मकपाली

Chamoli Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
गोपेश्वर। ‘ब्रह्मकपाली पिंडम विधाय विधिवत नरकात, तारये पित्रम्, पित्र तीर्थ मिदमं प्रोक्तम गयातोष्ट गुणाधिकम (स्कंद पुराण)’ अर्थात, श्री बदरीनाथ धाम में ब्रह्मकपाली में विधि पूर्वक पिंडदान करने से पितरों का नरकलोक से उद्धार हो जाता है। ब्रह्मकपाल के इस पवित्र स्थान को गया से आठ गुणा अधिक फलदायी पित्रकारक तीर्थ कहा गया है। पितृ पक्ष शुरू होते ही तीर्थयात्रियों के साथ ही स्थानीय लोग अपने पितरों के उद्धार के लिए यहां पहुंचते हैं।
पौराणिक मान्यता है कि पांडवों ने भी महाभारत के पश्चात पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए ब्रह्मकपाली में पितृ तर्पण और बदरीनाथ जी के दर्शन किए थे। तभी से यह भूमि पितरों के उद्धार के लिए उपयुक्त मानी जाती है। यहां पिंड बनाने के बाद उन्हें दूध, घी, दही, पानी, शहद आदि से शुद्ध कर पितरों को अर्पित किया जाता है।

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