अंग्रेज अफसरों की तरह उत्तराखंडी नेताओं की सोच में भी फर्क

Chamoli Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
गैरसैंण। ब्रिटिशकाल में कुमाऊं कमिश्नर ल्यूसिगटन गैरसैंण से बेहद प्रभावित थे। उन्होंने क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए सीनियर असिस्टेंट कमिश्नर को पौड़ी के बजाय लोहवा में बैठने के लिए कहा। इसके विपरीत क्षेत्र में वर्ष 1860 में भूमि बंदोबश्त करवाने वाले अंग्रेज अफसर वेकेट को लोहवा पसंद नहीं आया। दोनों अंग्रेज अफसरों की क्षेत्र के बारे में यह पसंद और नापसंद वर्ष 1875 में एटकिंसन के हिमालयन गजेटर में दर्ज है। आज भी हालात इससे इतर नहीं हैं। अंग्रेज शासन के अस्त होने के बाद उत्तराखंड उदय के भी 12 साल हो चुके हैं। लेकिन गैरसैंण को लेकर राजनीतिक दलों और नेताओं में आज भी एक राय नहीं है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी ने वर्ष 1987 में अपनी पुस्तक ‘उत्तरांचल क्यों’ में गैरसैंण-चौखुटिया के बीच राजधानी पर सहमति जताई है। उक्रांद हो या आंदोलनकारी संगठन या फिर वामपंथी दल सभी राजधानी के लिए गैरसैंण की बात करते हैं। लेकिन भाजपा नेता कोश्यारी अब अपनी बात शायद भूल चुके हैं। पूर्व सीएम रहे रमेश पोखरियाल निशंक हों या बीसी खंडूरी किसी ने भी गैरसैंण में राजधानी लाने की बात तो दूर मूलभूत सुविधाएं विकसित करने तक में रुचि नहीं दिखाई।
अलग उत्तराखंड से इत्तिफाक न रखने वाली कांग्रेस के सांसद सतपाल महाराज एवं प्रदीप टम्टा यूं तो गैरसैंण के समर्थक माने जाते हैं। लेकिन इसकी वजह इनका उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति और उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी से सीधे जुड़ा होना ही है। केंद्रीय राज्यमंत्री हरीश रावत 1998 में गैरसैंण रैली की योजना से आगे नहीं बढ़े तो सीएम विजय बहुगुणा गैरसैंण में कैबिनेट की बैठके के फैसले तक ही सीमित रह गए। साफ दिख रहा है कि डा. डीडी पंत, इंद्रमणि बड़ोनी और विपिन त्रिपाठी के सपनों की राजधानी चंद्रनगर गैरसैंण के लिए उत्तराखंडी सत्ता के पास इच्छा शक्ति नहीं है।

कोट-----------
इनका कहना है--
उक्रांद ने पेशावर कांड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर चंद्र नगर गैरसैंण की घोषणा की है। गैरसैंण के अलावा अन्य कहीं भी राजधानी स्वीकार नहीं है।
-त्रिवेंद पंवार, केंद्रीय अध्यक्ष, उक्रांद

सरकारों की उपेक्षा के बाद भी जनता गैरसैंण को ही राजधानी मानती है। इस भावना को दबाने में जुटे सत्ता, नौकरशाह एवं माफिया के गठजोड़ को मुंह की खानी पड़ेेगी।
- डा. शमसेर सिंह बिष्ट, अध्यक्ष, उत्तराखंड लोक वाहिनी

Spotlight

Most Read

Lucknow

यूपी में नौकरियों का रास्ता खुला, अधीनस्‍थ सेवा चयन आयोग का हुआ गठन

सीएम योगी की मंजूरी के बाद सोमवार को मुख्यसचिव राजीव कुमार ने अधीनस्‍थ सेवा चयन बोर्ड का गठन कर दिया।

22 जनवरी 2018

Related Videos

बर्फबारी के बीच बद्रीनाथ के कपाट छह महीने के लिए हुए बंद

बद्रीनाथ में बर्फबारी के बीच बद्रीनाथ के कपाट छह महीने के लिए बंद हो गए। यहां हुई बर्फबारी का असर मैदानी इलाके में भी देखने को मिला। इस बर्फबारी से तापमान में गिरावट आ गई है।

19 नवंबर 2017

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper