छावड़ी पूजन को उमड़े श्रद्धालु

Chamoli Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
कर्णप्रयाग। सोमवार को चंडिका मंदिर लगासू में धार्मिक अनुष्ठान के साथ छावड़ी पूजन का आयोजन किया गया। इस मौके पर अलकनंदा नदी से मंदिर परिसर तक भव्य जल कलश यात्रा भी निकाली गई। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित लंगासू के प्राचीन चंडिका मंदिर में तीन वर्ष में आयोजित होने वाले चंडिका महोत्सव में नवमी को मां चंडिका का छावड़ी पूजन किया गया। इस मौके पर देवी भक्तों ने अपने घरों से थाल पर मौसमी फल, श्रृंगार और पूजन सामग्री लाकर मंदिर में देवी को चढ़ाए। मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान के बाद श्रद्धालुओं द्वारा अलकनंदा नदी से मंदिर तक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। देर शाम प्रसाद वितरण किया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष चंद्रबल्लभ नगवाल ने बताया कि मंगलवार को मां चंडिका का धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होगा। नौटी के नंदा मंदिर में भी दशमी को यज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
ढोल-दमाऊं के साथ किया मां नंदा का स्वागत
देवाल। मां नंदा की लोकजात वापसी के तहत मंगलवार को ल्वाणी से विदा होते हुए रात्रि विश्राम के लिए उलंग्रा गांव पहुंची। अपनी आराध्य देवी के दर्शनों के लिए गांव में ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। प्रात: धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के बाद ढोल-दमाऊं और भंकुरों की गूंज के साथ ल्वाणी के ग्रामीणों ने मां श्रीनंदा की डोली एवं छंतोली को बमणवेरा के लिए रवाना किया। आधे रास्ते तक ल्वाणी के ग्रामीणों ने डोली को पहुंचाया। दोपहर को बमणवेरा में मां श्रीनंदा देवी का ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान गांव में ध्याणियों ने देवी दर्शन कर मनौतियां भी मांगी। वहीं मुख्य देवी मंदिर में देव नृत्य का आयोजन किया गया। देर शाम को मां श्रीनंदा की लोकजात रात्रि विश्राम के लिए उलंग्रा पहुंची। मंगलवार को देवी की डोली टुनरी होते हुए रात्रि विश्राम के लिए बेराधार पहुंचेगी।
श्रद्धालुओं ने नवमी पर की विशेष पूजा
कर्णप्रयाग/आदिबदरी। गांवों में नवमी महोत्सव धार्मिक अनुष्ठान के साथ आयोजित किया गया। इस मौके पर घरों से लेकर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। प्रखंड के ईड़ा, बधाणी, नौटी, डिम्मर आदि गांवों में नवमी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने अपनी आराध्य देवी मां नंदा को नये अनाज का भोग लगाया। रिंगाल की डालियों में पूजन और शृंगार सामग्री भी अर्पित की गई। आदिबदरी क्षेत्र के ग्राम पज्याणा, स्यालकोट, ढमकर और नगली के ग्रामीणों द्वारा नवमी महोत्सव पर अपनी ध्याण भराड़ी को ईश्वरदाणू के लिए विदा किया। इससे पूर्व पज्याणा गांव में जैसे ही भराड़ी देवी को मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकाला गया, तो उसके मानस पुत्रों ने ढोल-दमाऊं की थाप पर नृत्य करते हुए कई कलसे दूध, दही ग्रहण किया। मां भराड़ी देवी डोली के ईश्वरी खाल में पहुंचने पर समौड़ टोकरी नृत्य टीम द्वारा परंपरागत बिच्छुघास से मारने की परंपरा का निर्वहन भी किया गया। इस मौके पर आयोजन समिति के भोपाल सिंह, कैंप्टन जेएस सिंह, राम सिंह, नरेंद्र सिंह, प्रधान भरत सिंह आदि मौजूद थे।

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