पितरों के उद्धार के लिए पहुंच रहे हैं तीर्थयात्री

Chamoli Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
गोपेश्वर। पित्र पक्ष शुरू होने में हालांकि एक सप्ताह शेष है। बावजूद इसके देश-विदेश के तीर्थयात्री अपने पितरों के उद्धार के लिए बदरीनाथ धाम के ब्रह्मकपाली में पहुंचने लगे हैं।
29 सितंबर से श्र्राद्ध पक्ष शुरू हो रहा है। कहते हैं कि जितना महातम्य बदरी विशाल के दर्शनों का है, उतना ही ब्रह्मकपाली में पितृ तर्पण का भी है। पौराणिक मान्यता है कि पांडवों ने भी ब्रह्मकपाली में पितृ तर्पण और बदरीनाथ के दर्शन कर यहीं से स्वर्गारोहण को गए थे। यहां पिंड बनाने के बाद उन्हें दूध, घी, दही, पानी, शहद आदि से शुद्ध कर पितरों को अर्पित किया जाता है। अपने परिवार के साथ बदरीनाथ धाम पहुंचे दिल्ली निवासी महेश चतुर्वेदी और जमुना सिंह का कहना है कि समय की पाबंदी के चलते वे श्राद्ध पक्ष से पहले ही श्राद्ध करने के लिए धाम में आए हैं। यहां हमने अपने पूर्वजों को तर्पण दिया। गुजरात निवासी कुशल दीनू भाई कहते हैं कि ब्रह्मकपाली में पितर तर्पण करने के बाद मानसिक शांति मिल रही है। धाम में पितर तर्पण करने की कई वर्षों की श्रद्धा आज पूरी हो गई है।

पिंड दान से मनुष्य होता है पापों से मुक्त
गोपेश्वर। कहते हैं कि श्राद्ध पक्ष में पितर ब्रह्मकपाली में अपने परिजनों की राह देखते रहते हैं। पं. आचार्य अनुसूया प्रसाद नौटियाल का कहना है कि सबसे पहले तप्तकुंड में स्नान के बाद तीर्थ पुरोहित के साथ ब्रह्मकपाली में पितरों का ध्यान किया जाता है। यहां पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति और मनुष्यों को 21 जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि पिंड दान के समय यहां पितरों के आने का आभास भी होता है।

संसार में मनुष्य तीन ऋणों को लेकर जन्म लेता है। देव ऋण, ऋषि ऋण और पितर ऋण। देव आहूतियाें से देव ऋण, अध्ययन से ऋषि और श्राद्ध तथा पिंड दान से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। पिंड दान करते समय कुश, तिल, पीली चंदन और बुखला के फूल (सफेद फूल) प्रयोग में लाए जाते हैं। - भुवन चंद्र उनियाल, धर्माधिकारी, बदरीनाथ धाम।

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