गैरसैंण को सुविधाएं मिलीं न सुरक्षा

Chamoli Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
कर्णप्रयाग। गढ़वाल और कुमाऊं के मध्य स्थल गैरसैंण तहसील मुख्यालय सहित पूरे क्षेत्र की सुरक्षा भगवान भरोसे है। रेगुलर पुलिस के नाम पर मेहलचौरी और गैरसैंण में चौकी हैं जबकि अधिकांश क्षेत्र की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राजस्व पुलिस के सिर्फ सात पटवारियों के अधीन है।
20,81.082 हेक्टयर क्षेत्रफल में फैला गैरसैंण तहसील विसौंणा और दूधातोली क्षेत्र से पौड़ी जनपद और पांडुवाखाल से कुमाऊं की सीमा से जुड़ा है। वर्ष 90 के दशक से उत्तराखंड की प्रस्तावित राजधानी के लिए चर्चाओं में शुमार गैरसैंण में कानून और सुरक्षा व्यवस्था के प्रयास तक नहीं हो सके। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में एक भी पुलिस थाना नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए रेगुलर पुलिस चौकियां गैरसैंण और मेहलचौरी में हैं जो कर्णप्रयाग थाने के अधीन हैैं। रेगुलर पुलिस को गैरसैंण तहसील की 17 ग्राम पंचायतों के 19 गांवों की कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
तहसील के 78 ग्राम पंचायतों के 215 गांवों की कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी राजस्व पुलिस को सौंपी गई है। इस व्यवस्था के लिए राजस्व पुलिस ने क्षेत्र में 13 पटवारी सर्किल बनाए हैं, जिसमें वर्तमान में छह पटवारियों के पद रिक्त चल रहे हैं। स्थिति यह है कि सात पटवारी व्यवस्था को देख रहे हैं। जबकि आदिबदरी क्षेत्र में चार सर्किलों का चार्ज एक पटवारी के पास है।

रेगुलर पुलिस के अधीन ग्राम पंचायतें--
गैरसैंण एवं मेहलचौरी पुलिस चौकी-गैरसैंण, गैड़, सलियाणा, डांगीधार, कालीमाटी, दिवालीखाल, जंगलचट्टी, गडोली, धुनारघाट, सिलंगी, दाड़ीमडाली, सैंजी, ग्वाड़ तल्ला/मल्ला, मेहलचौरी, सिलंगा, रंगचौंड़ा एवं फरसो।

इनका कहना है--
गैरसैंण तहसील का क्षेत्रफल विस्तृत है। राजस्व पुलिस के तहत 13 पटवारी सर्किल हैं। जिसमें वर्तमान में 7 पटवारी ही कार्यरत हैं। सीमित साधनों में भी ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
- केएस नेगी, उप जिलाधिकारी गैरसैंण

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