आरबीआई भी मलारी की सूरत नहीं बदल पाया

Chamoli Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
गोपेश्वर। गोद लेने के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक नीती घाटी के मलारी गांव का कायापलट नहीं कर सका है। ग्रामीण आज भी बिजली, स्वास्थ्य सेवा और पानी जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस गांव को गत वर्ष आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) ने गोद लिया था। सुविधा के अभाव में अब इस सीमांत गांव के ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हैं।
मलारी गांव में वर्तमान में 120 परिवार निवास करते हैं। शीतकाल में यहां के ग्रामीण छह माह के लिए निचले क्षेत्रों में आ जाते हैं। अप्रैल से अक्तूबर माह तक ग्रामीण ऊन और साग-सब्जी का व्यवसाय करने यहां आते हैं। वर्ष 2010 में ऊर्जा निगम ने मलारी से फरकिया गांव तक राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत क्षेत्र में बिजली लाइन बिछाई, लेकिन आज तक इस योजना का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। क्षेत्र में पर्याप्त पानी है। जहां-तहां पेयजल स्रोत हैं लेकिन जल संस्थान के अधिकारियों की उदासीनता के चलते गांव में एक भी पेयजल योजना नहीं है।

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