अद्भुत व फलीभूत का समावेश है मां नंदा की लोकजात

Chamoli Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
गोपेश्वर/घाट। सीमांत चमोली जनपद में प्रति वर्ष आयोजित होने वाले मेलों और कौथीगों का एक अलग ही महत्व है। कुछ आयोजन यहां धार्मिक परंपरा को दृष्टिगत रखते हुए आयोजित होते हैं तो कुछ सांस्कृतिक व पर्यटन की अटूट मिशाल को संजोए रखने के लिए। उन्हीं में से एक है सिद्वपीठ कुरुड़ में इन दिनों आयोजित हो रही मां नंदादेवी लोक जात यात्रा।
विकासखंड घाट के सिद्वपीठ कुरुड़ स्थित मां नंदादेवी मंदिर में इन दिनों आस्था का सैलाब उमड़ा हुआ है। सोमवार को तीन दिनी धार्मिक मेले के अंतिम दिन सिद्वपीठ से धार्मिक परंपरा व पूजा-अर्चना के बाद बधांण तथा दशोली की मां नंदादेवी की डोली कैलाश के लिए प्रस्थान करेंगी। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। छोटी जात के नाम से प्रसिद्व मां नंदा की डोलियां विभिन्न पड़ावों पर अपने भक्तों की कुशल छेम पूछेगी। इस बीच बधांण की मां नंदा छह माह की यात्रा के बाद देवराड़ा मंदिर में रहेगी जबकि दशोली की डोली कैलाश यात्रा के बाद सिद्वपीठ कुरुड़ लौटेगी।


इन पड़ावों से गुजरेगी बधांण की मां नंदा की डोली-
चरबंग, फाली, उस्तोली, भेंटी, डुंग्री, सूना, चेपड़ो, इछोली, फल्तिया, मुंदोली, वाण, गैरोली पाताल, बैदनी कुंड में मां नंदा सप्तमी पूजा, वांक, ल्वांणी, उलगेरा, वेराधार, गोठिना, क्वराड़, डाखोली, छह माह तक देवराड़ा मंदिर में प्रवास।

इन पड़ावों से गुजरेगी दशोली की मां नंदा की डोली-
श्रीकोट, कमेड़ा, गडांसू, तेफना, नंदप्रयाग, राजबगटी, भेरणी, बैरासकुंड, मटई, पगना, ल्वाणी, रामणी।
बालपाटा में मां नंदा की सप्तमी की पूजा के बाद रामणी में आयोजित तीन दिवसीय मेले में शामिल होने के बाद वापस सिद्वपीठ कुरुड़।


ये है सिद्वपीठ कुरुड़ की धार्मिक महत्ता-
सिंद्वपीठ कुरुड़ से हर वर्ष आयोजित होने वाली मां नंदादेवी लोकजात यात्रा का इतिहास सातवीं शदी से जुड़ा है। मान्यता है कि कन्नौज के गौड पुजारियों के साथ मां नंदा शिला मूर्ति के रुप में यहां आई। तब दक्षिण भारत में गौड पुजारियों को मां ने दर्शन दिए कि मैं देवसारी तोक में शिला के रुप में प्रकट हुई हूँ। आप मेरी पूजा के लिए यहां पहुंचे। गौड पुजारियों के पूर्वज सुरमाभोज यहां पहुंचे। बाद में 9 वीं शदी में टिहरी के नरेश कनकपाल के साम्राज्य में भीषण आपदाएं आई बताया गया कि मां नंदा का दोष लगा है। राजा ने पूजा कराई पर मां नंदा खुश नहीं हुई। तब मां ने कहा कि मेरी पूजा केवल गौड पुजारियों के द्वारा ही होगी तब से कुरुड़ गौड ब्रहमण ही यहां के पुजारी हैं और हर वर्ष लोकजात तथा 12 वर्ष बाद नंदादेवी राजजात का आयोजन भी शुरु हुआ।

Spotlight

Most Read

National

मौजूदा हवा सेहत के लिए सही है या नहीं, जान सकेंगे आप

दिल्ली के फिलहाल 50 ट्रैफिक सिग्नल पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) डिस्पले वाले एलईडी पैनल पर यह जानकारी प्रदर्शित किए जाने की कवायद हो रही है।

19 जनवरी 2018

Related Videos

बर्फबारी के बीच बद्रीनाथ के कपाट छह महीने के लिए हुए बंद

बद्रीनाथ में बर्फबारी के बीच बद्रीनाथ के कपाट छह महीने के लिए बंद हो गए। यहां हुई बर्फबारी का असर मैदानी इलाके में भी देखने को मिला। इस बर्फबारी से तापमान में गिरावट आ गई है।

19 नवंबर 2017

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper