पैसा तो है, लेकिन नहीं होती सफाई

Chamoli Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
केस- एक : बछेर गांव के वार्ड सदस्य देवेंद्र सिंह का कहना है कि प्रधान ने हमें वर्ष 2008 में एक हजार रुपये रास्तों की सफाई के लिए दी थी। तब से गांव में कहीं इस धनराशि से सफाई नहीं हुई है और ना ही किसी पेयजल लाइन की मरम्मत।

केस- दो: ग्राम पंचायत खल्ल, दशोली के ग्रामीण गोविंद सिंह बिष्ट ने बताया कि गांव में साफ-सफाई और दूसरे कामों के लिए एनआरएचएम के तहत दी जा रही राशि सीधे प्रधान के जेबों में जा रही है। गांव में कहीं इसका उपयोग नहीं हो रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को इस राशि के आवंटन पर रोक लगा देनी चाहिए।

गोपेश्वर। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रतिवर्ष ग्राम पंचायतों को दी जा रही राशि का उपयोग कैसे हो रहा है, यह केवल उदाहरण भर है। करीब हर गांव की तस्वीर ऐसे ही है। कहीं भी इस पैसे का सदुपयोग धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग पैसा सीधे प्रधानों के खातों में डालता है। जिससे गांव की साफ-सफाई, आम रास्तों में ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव और क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को जोड़ने का कार्य होता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो प्रधान इस राशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। जिससे यह मालूम नहीं चलता कि उसका उपयोग हुआ भी या नहीं।
एनआरएचएम के तहत चमोली जनपद के 1148 गांवों को एक करोड़ 14 लाख 80 हजार रुपये दिए जाते हैं। एनआरएचएम भी प्रधानों के उपयोगिता प्रमाण पत्रों पर ही निर्भर है। चाहे वह सच हों या नहीं। उनके पास धरातलीय स्थिति के आकलन के लिए कोई मैकेनिज्ज्म नहीं नहीं है। जिससे वास्तविक स्थिति का पता चल सके। ऐसे में करोड़ों रुपये कहां जा रहे हैं, इसका पता नहीं लग सकता। दूसरी ओर, प्रधानों का कहना है कि उनसे कभी उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगें ही नहीं गए हैं।

प्रधान दी गई राशि के उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। जबकि इस बारे में सीडीओ के माध्यम से भी प्रधानों को पत्र भेजे गए। गांवों में यह पैसा खर्च हो रहा है कि नहीं, इसका कुछ पता नहीं लग पा रहा है। - दीपक खंडूरी, डीपीएम, एनआरएचएम, चमोली।

उपयोगिता प्रमाण-पत्र देने की याद ही नहीं थी। पिछले दो वर्षों में प्रमाणपत्र दे दिया था। अब ब्लॉक के माध्यम से दे दिया जाएगा। - वीरेंद्र सिंह रावत, ग्राम प्रधान लासी, दशोली।

गांव की साफ-सफाई पर पैसा खर्च हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग को इसकी देखरेख के लिए एक टीम गठित करनी चाहिए। उपयोगिता प्रमाण-पत्र देने के लिए हमें कभी कहा भी नहीं गया। - रमेश रावत, ग्राम प्रधान, राजबगठी, घाट क्षेत्र

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