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तीन घंटे की बारिश में नौ मकान ध्वस्त

Chamoli Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
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गोपेश्वर। पपड़ियाणा गांव और बसंत विहार में मंगलवार की रात करीब तीन घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ग्रामीणों पर आफत बनकर टूटी। गांव में भू-धंसाव होने से नौ मकान और 10 गौशालाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। रात्रि को मौके पर पहुंची गोपेश्वर थाना पुलिस और राजस्व पुलिस ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। प्रशासन ने फिलहाल प्रभावितों को पटियालधार के महिला मिलन केंद्र में शिफ्ट कर दिया है। गौशालाओं के ऊपर से आ रहे मलबे को देख ग्रामीणों ने अपने मवेशियों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया था।
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मंगलवार को दिनभर गुनगुनी धूप देख जहां क्षेत्र के लोग राहत की सांस ले रहे थे वहीं दोपहर बाद एकाएक मौसम ने करवट ले ली। मामूली बूंदाबांदी से शुरु हुई बारिश शाम सात बजे के करीब तेज हो गई। इसके बाद तीन घंटे के भीतर बारिश से बसंत विहार और पपड़ियाणा गांव के बीचोंबीच भू-धंसाव और भूस्खलन शुरू हो गया। यह देख ग्रामीणों के होश उड़ गए। भूस्खलन से आया मलबा बसंत विहार निवासी आलम सिंह सनवाल, गंगा सिंह रावत, चंद्रशेखर चमोला, मनोरमा भंडारी और पपड़ियाण गांव निवासी गुलाब सिंह पंवार, राम सिंह, रघुवीर सिंह, धाम सिंह और चंद्र सिंह के मकानों को क्षति पहुंचाते हुए पटियालधार सड़क तक जा पहुंचा। यहां स्थित नौ ग्रामीणों की गौशालाएं भी क्षतिग्रस्त हो गईं।
बुधवार को जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन, नपा अध्यक्ष प्रेम बल्लभ भट्ट, कांग्रेस नगर अध्यक्ष अरविंद नेगी सहित कई जिलास्तरीय अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया।

गोपेश्वर-पपड़ियाणा सड़क भी आयी चपेट में
स्पोर्ट्स स्टेडियम से हुए भू-धंसाव के चलते गोपेश्वर-घिंघराण मोटर मार्ग भी कई जगहाें पर क्षतिग्रस्त हो गया है। पपड़ियाणा गांव के बीचोंबीच से आया मलबा मोटर मार्ग पर फैल गया है। जिससे बसंत विहार, मंदिर मार्ग, पटियालधार क्षेत्र के लोगाें को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने लोनिवि के ईई को मार्ग को शीघ्र खुलवाने के निर्देश दिए हैं।


क्लोराइडयुक्त फिलाइटस से हो रहा भू-धंसाव
पीजी कालेज गोपेश्वर में भूगर्भ विज्ञान के विभागाध्यक्ष के अनुसार पपड़ियाणा गांव और बसंत विहार मुहल्ला क्वार्टजाइट स्लेट फिलाइट चट्टान पर बसा है। इस चट्टान में माइका, केल्साइड, टाल्क और क्लोराइडयुक्त खनिज स्थित है जो अधिक गर्मी होने पर मिट्टी पर दबाव बनाती हैं। जब बारिश होगी तो स्वाभाविक है कि मिट्टी खिसकने लगती है। जिससे आसपास चट्टान के बोल्डर भी कमजोर पड़ने लग जाते हैं जो लैंड स्लाइड का रूप धारण कर रहे हैं।

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