अधूरे सपनों को पूरा करें युवा

Chamoli Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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कर्णप्रयाग। आजादी के पैंसठ साल गुजरने के बाद भी दर्जनों गांवों में बुनियादी सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। देश की आजादी के लिए लड़ने वाले वीर सेनानियों ने जो सपने आजाद भारत के विकास के लिए देखे थे, उनके पूरा न होने का दर्द उनकी जुबां से झलक रहा है।
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गौचर के पनाई गांव निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी 88 वर्षीय भीम सिंह बिष्ट कहते हैं कि आजादी के पैंसठ साल बाद भी देश विकास के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रकृति के दिए संसाधनों का अवैध दोहन हो रहा है। राजनीति विकास के नाम पर वोट तक सीमित हो गई है। कहना है कि आजादी के बाद जो स्वर्णिम सपने भारत के निर्माण के देखे गए थे, उनमें आज भी कुछ गुम से हो गए हैं। यही दर्द देवाल ब्लाक के सैनिक बाहुल्य गांव सवाड़ निवासी 98 वर्षीय स्वंतत्रा संग्राम सेनानी काम सिंह भंडारी, गैरसैंण निवासी पदम सिंह खत्री एवं रणजीत सिंह तथा द्धितीय विश्व युद्ध में प्रतिभाग करने वाले सवाड़ गांव के सैनिक आमल सिंह भी बयां कर गए।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अमर उजाला से बातचीत में इन वीर सपूतों का कहना था कि नई पीढ़ी को जोश एवं अपने ज्ञान से देश, राज्य एवं अपने घर, गांव और क्षेत्र के लिए कार्य करना होगा, जिससे अधूरे सपनों को साकार किया जा सके। उन्होंने स्वर्णिम भारतवर्ष के निर्माण के सपने देखे थे वे सपने आजादी के कुछ ही सालों में गुम हो गए हैं। इसे बिडंबना ही कहा जाएगा कि आज भी वीर सपूतों के गांव सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इनके नाम पर घोषणाएं तो हुईं लेकिन वे भी केंद्र और राज्य में बदलती सरकारों के साथ धूमिल होती गई।
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