सारकोट कोठा के चार कमरे ध्वस्त

Chamoli Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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गैरसैंण। सारकोट की ऐतिहासिक धरोहर सारो का कोठा नष्ट होने की कगार पर है। 19वीं शताब्दी में निर्मित 84 कमरों के इस कोठे के चार कमरे इसी सप्ताह भारी बरसात से जमींदोज हो गए हैं जबकि अन्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
गढ़वाल में पंवारवंशी शासनकाल में सारकोट सारो का कोट अर्थात किला 18 शताब्दी के मध्यकाल का माना जाता है। सन 1851 में आए भूंकप में ध्वस्त हुए कोठे के बाद वर्तमान कोठे का निर्माण हुआ था। इसमें अदालत कक्ष, हवालात, सारो नायक का आवास, कारकूनों (कर्मचारियों) के निवास एवं घुड़साल भी बने थे। देश की आजादी के 65 साल और उत्तराखंड राज्य के 12 सालों में भी प्रदेश की इन धरोहरों की चिंता नहीं होने से वे नष्ट होने की कगार पर हैं। सारकोट कोठा का एक हिस्सेदार बलवंत सिंह पुत्र चंदन सिंह कमरों के ध्वस्त होने से बेघर हो गया है, और वह अपने चाचा श्राद सिंह के घर में शरण लिए हुए हैं। कोठा के अन्य हिस्सेदारों में राम सिंह, दयाल सिंह, मेहरबान सिंह, दरवान सिंह, राम सिंह, श्याम सिंह, मेहरबान सिंह एवं बटन सिंह को भी कोठा टूटने की स्थिति में बेघर होने का खतरा बना है। पूर्व क्षेपंस नारायण सिंह ऐतिहासिक धरोहर को संजोने के साथ कोठा टूटने से बेघर परिवारों के पुनर्वास को जरूरी मानते हैं। प्रेस सूचना ब्यूरो के उप निदेशक डा.प्रकाश थपलियाल का कहना है कि सारकोट किले का निर्माण 18वीं सदी के मध्य हुआ होगा।

इनका कहना है--
सारकोट के कोठा को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संजोने के लिए आवेदन-प्रत्यावेदन किए गए लेकिन सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
- गबर सिंह पूर्व प्रधान, सारकोट

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