पॉलीथिन प्रतिबंध को मुंह चिढ़ा रहे प्लास्टिक के झंडे

Chamoli Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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कर्णप्रयाग। एक ओर सरकार पॉलीथिन पर पूर्ण पाबंदी की बातें कह रही है तो दूसरी ओर राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र सहित दो अक्तूबर पर प्लास्टिक के झंडों का अंधाधुंध बाजारीकरण इस प्रतिबंध पर सवाल खड़े कर रहा है। जिन हाथों में पॉलीथिन पर प्रतिबंध के लिए रैलियों में तख्तियां सजती हैं उन्हीं हाथों में राष्ट्रीय पर्व पर निकलने वाली रैलियों में प्लास्टिक के झंडे शोभा बनने के लिए बाजार पट चुके हैं।
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देश प्र्रेम का उत्सव मनाने के लिए दुकान, कार्यालय, वाहन सहित स्कूलों और अन्य समारोहों में तिरंगे के बैज, पट्टियां और छोटे-छोटे झंडे इन दिनों बाजारों में खूब बिक रहे हैं लेकिन पर्यावरण के लिए नासूर बने प्लास्टिक का प्रयोग इन झंडों में बखूबी किया जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इन झंडों के स्थान पर कपडे़ के झंडे प्रयोग किए जाने चाहिएं।
इनका कहना है-
-सरकार द्वारा कपड़े या पेपर के छोटे झंडे बाजारों में उपलब्ध कराए जाने चाहिएं ताकि कम से कम राष्ट्रीय पर्व के मौके पर पॉलीथिन प्रतिबंध का संदेश भी जा सके और इन प्लास्टिक के झंडों पर भी प्रतिबंध लग सके।
-सुभाष चमोली, प्रवक्ता निजी विद्यालय संगठन चमोली।

हालांकि प्लास्टिक के तिरंगे के प्रयोग की जानकारी संज्ञान में नहीं हैं लेकिन प्रतिबंधित प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े या कागज से बने तिरंगों का प्रयोग किया जाना चाहिए। सभी शिक्षण संस्थाओं को इसकी जानकारी दी जाएगी और प्रयोग पर कार्रवाई भी की जाएगी।
-केएल रड़वाल, खंड शिक्षा अधिकारी कर्णप्रयाग।
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