अध्यापन के साथ पर्यावरण संरक्षण को समर्पित शिक्षक डा. सोनी

Chamoli Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
कर्णप्रयाग। ‘आवा दिदो, भुलाें आवा, लाज धरती की बचावा, डाली रोपा रमझम, चला भै ठमठम..’ लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीत की ये पंक्तियां शिक्षक डा. त्रिलोक सिंह सोनी के पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए डेढ़ दशक से चली आ रही सक्रियता को बयां करती है। अध्यापन के अलावा डा. सोनी गांव-गांव जाकर सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौधारोपण और वनों के संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
पर्यावरण जागरूकता की अलख जगाने वाले जनपद चमोली के देवाल प्रखंड के पूर्णा गांव निवासी स्व. मोहन राम और स्व. कुंती देवी की छ: संतानों में सबसे छोटे पुत्र डा. त्रिलोक चंद सोनी ने अध्यापन के साथ वर्ष 1998 में हरियाली की सुरक्षा का संकल्प ले लिया था। राजकीय हाईस्कूल उर्गम से सिनाई एवं वर्तमान में लोस्तू बड़ियारगढ़ के राजकीय हाईस्कूल मोलधार तक के अध्यापन के सफर में वे चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और उत्तरकाशी जिलों के कई क्षेत्रों में स्कूली बच्चों के साथ विद्यालयों, विभागीय प्रांगणों और गांवों में पौधों का रोपण कर चुके हैं।

मां से मिली प्रेरणा--
‘डाली-बोटिली रैली तै, लखड़ा भी मिलला और घास भी, यूं तै बचाणू और बड़ाणू को जिम्मा त कै न कै तै लेण पोडलू..’ पढ़ाई के दौरान मां की इस सलाह ने सोनी को प्रभावित किया और उन्होंने पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए कार्य करने संकल्प ले लिया। आज वे वन विभाग से न्यूनतम दरों पर विभिन्न प्रकार की पौध खरीद कर नई पीढ़ी के साथ वृक्ष मित्र अभियान में जुटे हुए हैं।

इनका कहना है--
पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन अपने आप में पुण्य का कार्य है। शिक्षक डा. सोनी इस कार्य में निस्वार्थ भाव से स्वयं के खर्चे पर कार्य कर नई पीढ़ी एवं ग्रामीणों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए बधाई के पात्र हैं। विभाग की ओर से उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
-नरेंद्र सिंह राणा, अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक गढ़वाल मंडल

पर्यावरण के प्रति इस तरह की सक्रियता अनूठी एवं प्रेरणादायी है। डा. सोनी जब भी चमोली में कार्यक्रम रखेंगे तो मैं उसमें शामिल हूंगा। विभाग द्वारा उन्हें पौधें भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
-एसएन सिंह, एसीएफ केदारनाथ वन प्रभाग गोपेश्वर चमोली

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