बदियाकोट की व्यवस्थाओं को मार गया लकवा

Bageshwar Updated Tue, 06 May 2014 05:31 AM IST
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बागेश्वर। 6850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बदियाकोट तक पहुंचने के लिए 4 किलोमीटर उबड़, खाबड़ और रपटीले पैदल रास्ते से चलना पड़ता है। ग्रामीणों को लोकसभा चुनाव की जानकारी है, पर उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं। क्योंकि जून में आई आपदा के जख्म ही अब तक नहीं भरे हैं।
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बदियाकोट 544 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। दिल्ली में बैठने वाली सरकार गांव के लोगों से 542 किमी दूर है। सड़क के नाम पर अब जाकर पीएमजीएसवाई से मुनार से मोटरमार्ग बन रहा है। पैदल पुल जून की आपदा में बह गया था। कुछ दिन पहले ही वहां नए पुल का निर्माण शुरू हुआ है। गांव में जाने के लिए लोनिवि ने नदी के ऊपर ट्राली लगा रखी है। बदियाकोट पोलिंग बूथ में 477 और कालू बदियाकोट में 274 मतदाता हैं। ग्रामीण आज भी खच्चरों की पीठ में लादकर जरूरी सामान लाते हैं। तीख से किलपारा तक जाने के लिए बना पुराना रास्ता करीब 60 मीटर तक पूरी तरह ध्वस्त है। ग्रामीण पिंडर के किनारे चट्टान में घास पकड़कर नीचे उतरते हैं। बच्चे झुंड में स्कूल जाते हैं। आपदा के बाद से गांव में छाई खामोशी अभी टूटी नहीं है।
एक रास्ता तक नहीं बना पाए
गांव के दलीप सिंह, मलक सिंह, पान सिंह, रघुवर सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के वक्त विधायक ललित फर्स्वाण ने पूरी मेहनत की। 15 दिन तक यहां डेरा डाला, हेलीकाप्टर से राशन मंगवाया, पर अधिकारियों की सुस्ती के कारण अब भी क्षतिग्रस्त मुख्य पैदल मार्ग का निर्माण अधूरा है। कुछ लोगों को आज तक क्षतिग्रस्त मकानों का मुआवजा नहीं मिला है।

शाम चार बजे मिलती है बिजली
लघु जल विद्युत परियोजना से ग्रामीणों को शाम चार बजे से सुबह सात बजे तक बिजली मिलती है। पूरे समय बिजली नहीं मिलने से टेलीविजन बंद रहते हैं। ग्रामीण आज भी रेडियो से ही समाचार सुनते हैं।

इस गांव में एक तरफ कर्मचारी रहने को तैयार नहीं होते, लेकिन जीआईसी में कपकोट निवासी हरीश कपकोटी 14 साल से और प्राथमिक पाठशाला में रुड़की निवासी प्रभारी प्रधानाध्यापक मुधसूदन शर्मा 8 साल से कार्यरत हैं। गांव के लोग उनकी कर्तव्यनिष्ठा और लगन के कायल हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा एएनएम भवानी देवी के ऊपर है।

913 रुपये में पहुंचता है सिलेंडर
यहां रसोई गैस का एक सिलेंडर 913 रुपये में पहुंचता है। गांव के करीब 20 लोगों के पास रसोई गैस के सिलेंडर हैं लेकिन इसका इस्तेमाल वह बहुत जरूरी काम के लिए ही करते हैं।
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