आस्था का केंद्र है शिखर भनार

Bageshwar Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
भराड़ी/बागेश्वर। यूं तो उत्तराखंड की धरती पर तमाम पौराणिक और बड़ी आस्था के देवालय हैं, लेकिन यहां के कुछ मंदिरों के साथ लोगों की गहरी आस्था आज भी जुड़ी है। ऐसे ही पवित्र स्थानों में दो नाम हैं कपकोट के शिखर और भनार मंदिर। शिखर मंदिर में भगवान मूलनारायण और भनार में बजैंण देवता की पूजा होती है। शिखर से हिम श्रंखलाओं का सुंदर नजारा है।
कपकोट ब्लाक में पिंडारी ग्लेशियर जाने वाले पैदल मार्ग में शिखर नामक पर्वत पर भगवान मूलनारायण विराजमान हैं। इन्हें भगवान श्रीकृष्ण का स्थानीय रूप भी माना जाता है। मान्यता है कि त्रेता युग में लोक कल्याण के लिए श्रीकृष्ण ने यह रूप धारण किया। एक अन्य मान्यता के अनुसार मूलनारायण मघन नामक ऋषि और मायावती के पुत्र थे, जिन्हाेंने रमणीक शिखर पर्वत को निवास के लिए चुना। उनके ज्येष्ठ पुत्र का नाम नौलिंग और कनिष्ठ पुत्र का बजैण था। नौलिंग का मंदिर सनगाड़ और बजैण का मंदिर भनार में स्थित है। नौलिंग और बजैण देवता के प्रति लोगों में गहरी आस्था है। यह दोनों ही स्थल अत्यंत रमणीक हैं। इनसे भी अधिक शिखर पर्वत का सौंदर्य है। जहां से हिमालय की चोटियां काफी नजदीक से महसूस होती हैं। तमाम संभावनाओं के बावजूद यह स्थल पर्यटन के साथ नहीं जुड़ सके और आज भी व्यापक पहचान के लिए तरस रहे हैं। 1991 में पंजाबी अखाड़े के महंत बद्रीनारायण ने यहां के मंदिरों का नवनिर्माण कराया।

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