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जल संवर्द्धन के लिए चाल-खाल उपयोगी

Bageshwar Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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बागेश्वर। महोगाड़ जलागम प्रबंधन के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया है। कार्यशाला में पिरूल के चेकडैम बनाने की जानकारी दी। मुख्य अतिथि कुविवि अल्मोड़ा के प्रो. जेएस रावत ने कहा कि जल संरक्षण और संवर्द्धन के लिए चाल-खाल योजना सबसे अधिक कारगर है। इसे तकनीकी रूप बनाने की आवश्यकता है।
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गरुड़ ब्लाक के चमोली गांव में प्रो. श्री रावत ने कहा कि पिरूल के चेकडैम पानी की बर्बादी को रोकने में कारगर होता है। अल्मोड़ा की प्रो. विजया ढौंडियाल ने महिला तथा नवयुवक मंगल दलोें से आह्वान किया कि वह जल संरक्षण तथा संवर्द्धन के लिए आगे आए। महिलाओं से पुरानी रुढ़िवादी प्रवृति छोड़ने को कहा। जिला उद्यान अधिकारी डा. नरेंद्र कुमार ने बागवानी तथा फल उत्पादन की विस्तार से जानकारी दी। किसान विज्ञान केंद्र काफलीगैर के वैज्ञानिक डा. कमल पांडे ने कहा शोधित बीजों से जहां उत्पादन बढ़ेगा वहीं लोगों के रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। खंड विकास अधिकारी जीएस गड़िया ने बताया कि मनरेगा के तहत इस कार्य के लिए दो लाख रुपये वर्तमान में दिए जा रहे हैं। अध्यक्षता करते हुए हिमालय ट्रस्ट के सचिव सदन मिश्रा ने हिमांचल तथा जंमू कश्मीर आदि प्रदेशों में फल उत्पादन से समुदाय को होने वाले आय के बारे में बताया। ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए चेकडैम तथा चाल खाल का निर्माण किया। इस मौके पर सुनील कांडपाल, किशन राणा, देवेंद्र कांडपाल, संजय कांडपाल, दुर्गादत्त, चंद्रशेखर, शिव गिरी, पान गिरी, पूरन डसीला आदि मौजूद थे।
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