बागेश्वर जिले के 62 गांवों पर मंडरा रहा आपदा का खतरा

Haldwani Bureau Updated Mon, 05 Jun 2017 11:33 PM IST
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बागेश्वर जिले के 62 गांवों पर मंडरा रहा आपदा का खतरा
बागेश्वर। बागेश्वर जिले के 62 गांवों पर आपदा का खतरा मंडरा रहा है। इनमें कांडा तहसील के खड़िया खनन वाले गांव भी शामिल हैं। वर्षाकाल में संवेदनशील गांवों में किसी भी तरह की आपदा से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

बागेश्वर जिला आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। अधिक बारिश होने पर पहाड़ में हर साल भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। जिले में होने वाले खड़िया खनन के कारण भूस्खलन के खतरे और अधिक बढ़ गए हैं। खनन के कारण खोखले हो रहे गांवों में बारिश में कभी भी तबाही मच सकती है। आपदा के कारण अब तक जिले में हुई भूस्खलन की पांच बड़ी घटनाओं में 94 लोगों की मौत हो चुकी है। 1983 में कर्मी के भयात तोक में भूस्खलन में 37 लोग मारे गए थे जबकि 2010 में सुमगढ़ में हुए भूस्खलन ने 18 स्कूली बच्चों की जिंदगी लील ली। जिले की कपकोट तहसील आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हैं।

यहां के लगभग 52 गांवों पर आपदा का खतरा मंडरा रहा है। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण कुंवारी गांव का नक्शा बदल चुका है। अन्य गांवों की स्थिति भी ठीक नहीं है। बरसात शुरू होते ही आपदा प्रभावित गांवों के लोग डर-डर कर रातें गुजारते हैं। अत्यधिक भूस्खलन के कारण कुंवारी, सूपी, सेरी, दोबाड़, बडैत, हरसिंग्याबगढ़, बूरमोला, बामनखेत, नौकुड़ी, शीरी, शामा, रमाड़ी, कनौली, नामतीचेटाबगढ़, खेती किसमिला, भनार, माजखेत, चुचेर, लाथी, लीती, हमटीकापड़ी, रातिरकेठी, मल्खाडुंगर्चा, गोगिना, रिठकुला, झूनी, खलझूनी, कर्मी, बघर, सरण, बदियाकोट, खर्ककानातोली, लोहारखेत, सनगाड़, खाती, बड़ी पन्याली, रीमा, बाछम को अत्यधिक खतरे वाले गांवों की सूची में शामिल हैं।

गरुड़ विकासखंड में जिनखोला, मटेना, कौसानी, पय्यां व कुलांऊ जबकि बागेश्वर ब्लाक में आने वाली कांडा तहसील के पूरे खनन क्षेत्र को खतरनाक वाले क्षेत्र में शामिल किया गया है। कपकोट ब्लाक के फरसाली, दुलम, सूडिंग, सौंग, फुलवारी, गुलेर, सलिंग, हरसीला, उत्तरौड़ा, गुलम परगड़, झोपड़ा, माजखेत, रैंथल, बस्कूना, असौं और बागेश्वर ब्लाक के कफलखेत, ठाकुरद्वारा, कठायतबाड़ा को मध्यम खतरे वाले इलाकों में शामिल हैं। संवेदनशीलता के बावजूद खतरे की जद में आए गांवों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की योजना अभी तक सरकार नहीं बना पाई है।

कपकोट विकासखंड में संवेदनशील गांवों की संख्या सबसे अधिक है। कांडा के पूरे खनन क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया है। प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर बरसात में आपदा से निपटने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। टेंट, रोप सहित अन्य आवश्यक उपकरण सभी थानों में रखे गए हैं। ग्रामीणों को भी आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। संवेदनशील गांवों के पुनर्वास के लिए सूची शासन को भेजी गई है।
- शिखा सुयाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, बागेश्वर।

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