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फिंगर प्रिंट लिए, डीएनए की तैयारी

Amroha Updated Tue, 12 Feb 2013 05:31 AM IST
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अमरोहा। पुलिस युवती की शिनाख्त से लेकर उसकी वीभत्स हत्या के खुलासे के मामले में किसी बिंदु से चूकना नहीं चाहती। यही वजह है कि शव से कातिलों के फिंगर प्रिंटिंग ले लिए गए। जबकि मिस्ट्री में आगे बढ़ने के लिए पुलिस ने डीएनए की तैयारी भी कर ली है। दरअसल, कातिलों तक पहुंचने के लिए पुलिस की निगाहें युवती की कोख में मिले उन शिशुओं पर टिकीं हैं जिन्हें जन्म लेने से पहले ही मौत के घाट उतार दिया गया। इस आशंका को भांपते हुए कि शिनाख्त से लेकर बच्चों के वास्तविक बाप को कैसे पहचाना जाएगा, इस दृष्टि से पोस्टमार्टम के दौरान ही डीएमए सैंपल भी ले लिए गए हैं।
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जेहन में तैर गई दिल्ली की दरिंदगी
अमरोहा। देश भले ही दरिंदगी और हैवानियत के दोषियों को फांसी की सजा देने के लिए चीख चीख कर मांग कर रहा हो। लेकिन दुस्साहस का आलम यह है कि घिनौनी वारदातें खत्म तो दूर थमने का नाम भी नहीं ले रही हैं। इसे कातिलों के साथ दुस्साहस का नमूना मानें कि कत्ल और दरिंदगी तो दूर वारदात को अंजाम देकर शव को खुले आसमान के नीचे शहर के बीचोबीच सबसे अहम चौराहा गांधी मूर्ति पर टांगकर चले गए। हालांकि पुलिस ने भी मौके और वक्त की नजाकत को भांपते हुए शव को मिनटों में उठाकर ले जाने में जरा देरी नहीं की। सचाई यही है कि वीभत्स और झकझोर देने वाले नजारे ने हर निगाह और हर शख्स के रोंगटे खड़े कर डाले।


कहां थी पुलिस पिकेट?
अमरोहा। अपराधों को लेकर जितनी सरकार घिरी है उससे कहीं ज्यादा जिला पुलिस भी अपनी खुलती कलई से घिरती कम नजर नहीं आ रही। इसे लापरवाही की हद मानें कि जिस गांधी मूर्ति पर रात दिन पुलिस पिकेट मुस्तैद रहती हो ठीक उसी स्थान पर हत्यारे युवती की सिर कटी लाश को फेंककर भाग निकले। ऐसे में दिनभर शहर की सड़कों पर पेट्रोल फूंकने वाली पुलिस की लैपर्ड टोलियों की सक्रियता और पिकेट पर पुलिस की मुस्तैदी पर भी तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। स्वयं प्रभारी पुलिस अधीक्षक शकील अहमद खां कहते हैं कि पिकेट तैनात रहती है उनकी जानकारी में नहीं है। अभी शहर कोतवाली से जानकारी मांगते हैं। जबकि शहर कोतवाली प्रभारी ने कई कई बार रिंग करने पर भी स्टाफ और महकमे की लापरवाही के खुलासे के डर से फोन रिसीव करना जरूरी नहीं समझा।

युवती तो शहर की ही
अमरोहा। यूं तो युवती की लाश और घटनास्थल पर अनगिनत ऐसे सवाल हैं जो पुलिस के लिए आने वाले दिनों में किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं हो सकते। लेकिन शव को बीच चौराहे पर रिहाइशी और भीड़भाड़ वाले स्थान पर फेंके जाने से इतना साफ माना जा रहा है कि मृतका जरूर शहर या उसके आसपास की ही होगी। पुलिस का मानना है कि कातिलों का ताल्लुक जरूर शहर से ही रहा होगा। यदि हत्या बाहर होती या फिर दूसरे स्थान से शव लाकर फेंका जाता तो कातिलों के लिए लाश को ठिकाने के लिए तमाम सुनसान इलाके मिल सकते थे। उधर, एक लाइन आनर किलिंग की ओर भी उठ रही है। लेकिन पुलिस उसे बेदम मान रही है।

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