मरीज जिए या मरे, इनकी बला से

Amroha Updated Thu, 20 Dec 2012 05:31 AM IST
अमरोहा। चुनावी मंच से मुफ्त में चिकित्सीय सेवाएं मुहैया कराने की घोषणाएं और वादों के जिला अस्पताल में सरकार के मुलाजिम धुएं में उड़ा रहे हैं। भगवान का रूप कहलाए जाने वाले डाक्टर एक तानाशाह का किरदार निभाते नजर आए। दो-दो मंत्री और इतने ही विधायकों की सत्ताधारी ताकत वाले जिले के डाक्टरों ने प्रसव पीड़ा से जमीन पर पड़ी गर्भवती को धक्के देते हुए बाहर ही नहीं निकाला बल्कि पांव टूटने से कराह रहे दो माह के मासूम के दर्द से भी इनका दिल नहीं पसीजा। स्थिति यह रही कि डाक्टरों की दुत्कार और ठोकरों से बुजुर्ग रोगी को इमरजेंसी से गेट तक पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो सका। लिहाजा रोगियों को उल्टे पांव रोते बिलखते लौटना पड़ा। हालांकि चंद तमाशबीनों ने जरूर चंदा करके गेट पर फफक रही गर्भवती को टैंपो पर लादकर निजी चिकित्सक के पास पहुंचाया। जबकि सूचना पर पहुंचे सीएमओ ने जरूर सरकारी शुल्क की डिमांड पूरी नहीं करने पर स्टाफ द्वारा लौटा दी गई मासूम को अस्पताल ही नहीं पहुंचाया बल्कि उसका इसी अस्पताल में मुफ्त में प्लास्टर चढ़वाकर महकमे की बेदर्द तस्वीर उजागर करने और अफसरों की फजीहत होने से बचा ली। इतना ही नहीं मासूम को लौटाने वाले डाक्टर की गलती को स्वीकारते हुए उसको फटकार लगाकर भीड़ के गुस्से को काफी हद तक बेकाबू होने से बचा लिया।

सीन नंबर-एक

समय-12:00 बजे
मेन गेट से घुसते ही रिक्शे से नौगंवा सादात के नगली गांव निवासी तालिब की पत्नी शाहजहां सास हमीदन व बेटे अमन के साथ प्रसव पीड़ा से तड़पती हुई पहुंची। पहले डाक्टर साहब को बुलाने की गुहार लगाती रही। हालात बिगड़ते ही सीएमएस बाहर आए और केस बिगड़वाकर आने का हवाला देते हुए बुरा भला कह बाहर निकलवा दिया। भीड़ में उबाल आते ही अपनी बेटी का हाथ पकड़कर सैरसपाटे वाले अंदाज में खिसक लिए। रही कसर बाकी स्टाफ ने दुत्कारते हुए पूरी कर डाली। हंगामा शुरू हुआ। फोन घनघनाने पर भी सरकारी एंबुलेंस तक का सहारा नहीं मिल सका। कुछ लोगों की मदद से गर्भवती को नर्सिंग होम में दाखिल कराया गया।

सीन नंबर-2
12.45 बजे
मोहल्ला इकबालनगर के फुरकान की पत्नी कमर जहां दर्द में तड़पती दो माह की बेटी इकरा को लेकर पहुंची। गिरने से पांव में फ्रैक्चर का हवाला देकर डाक्टर के पास प्लास्टर की गुहार लगाती रही। सरकारी फीस 268 रुपये जमा करने की सलाह दी गई। सौ रुपये ही होने का हवाला देकर इंसानियत का वास्ता देती रही। स्टाफ ने भगा दिया। इस बीच अमानवीय घटनाक्रम बढ़ता देख मीडियाकर्मियों की सूचना पर सीएमओ डा. ज्ञान सिंह पहुंचे। माजरा समझते ही डाक्टर को जमकर फटकार लगाई और मिनटों में उसी मासूम के पांव पर प्लास्टर चढ़ गया जिसे सैकड़ों बार अस्पताल से निकल जाने का हुक्म दिया जा रहा था।



सीन नंबर-तीन
1.35 बजे
सांस की शिकायत पर पहुंचे बुजुर्ग नामे अली को दाखिल करने से इंकार पर स्टाफ ने स्ट्रेचर तक देने से इंकार कर दिया। दोनों बेटों ने एक दरी पर वृद्ध को लिटाकर सहारे से किसी तरह बाहर निकाला और फिर एंबुलेंस नहीं मिलने पर टैंपो से गांव वापस लेकर लौट गए।



एक तस्वीर ये भी

108 सेवा ने भी हाथ खड़े किए
अमरोहा। लखनऊ से गांव और हर गली के कोने तक समाजवादी पार्टी की उपलब्धि के रूप में गिनाई जा रही 108 एंबुलेंस सेवा की हकीकत से भी रोगी और उनके तीमारदार रूबरू हो ही गए। अस्पताल के फर्श पर ही पड़े-पड़े लगभग आधे प्रसव से गुजर चुकी गर्भवती को अन्यत्र ले जाने के लिए इस सेवा का नंबर डायल करने पर जवाब मिला कि डाक्टर साहब से परची लिखवा दो तभी लेकर जाएंगे। जिसे सुन हर कलेजा मुंह से बाहर आने को जोर मारता रहा।


डा. ज्ञान सिंह (सीएमओ)
महिला में खून की कमी होने के कारण डाक्टर ने उसे मुरादाबाद जाने की सलाह दी थी। पूछताछ की जा रही है। फिर भी यदि कोई लिखित में शिकायत करता है तब विभागीय कार्रवाई में ढिलाई नहीं होगी।

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