पांच सौ खतों में छिपा है ‘पाकीजा मुहब्बत’ का राज

Amroha Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
अमरोहा। भले ही रुपहले परदे पर ‘पाकीजा’ को रिलीज हुए चालीस बरस बीत चुके हैं, लेकिन कमाल अमरोहवी और मीना कुमारी की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे पहलू भी हैं, जिनसे शायद कभी परदा नहीं हट सकेगा। हालांकि सच यह है कि जमाने की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी व शौहर कमाल अमरोहवी के बीच चली मुहब्बत के दरम्यान लिखे पांच सौ से ज्यादा ऐसे खत आज भी मौजूद हैं जिनमें आज भी ‘पाकीजा’ का राज छिपा है। बाबा (कमाल) और छोटी मां (मीना कुमारी) की लाडली बेटी के पास ये खत उनकी सुनहरी यादों की शक्ल में महफूज हैं।
‘पाकीजा’ बनाकर दुनिया में अमरोहा की सरजमीं को पहचान दिलाने वाले लेखक एवं निर्देशक कमाल अमरोहवी की बेटी रुख्सारे जहरा ने अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान ऐसा दर्द बयां किया मानों सात दशक पुराने दौर में पाकीजा मुहब्बत ताजा हो गई। बाबा (कमाल अमरोहवी) की जिंदगी से जुड़ी यादें साझा करते हुए कहा कि पापा ने कभी छोटी मां को तलाक नहीं दिया, दोनों एक-दूसरे से बेपनाह मुहब्बत करते थे। हां, रूठने और मनाने का सिलसिला चलता था। सिर्फ सस्ती शोहरत हासिल करने के लिए कुछ लोग झूूठी कहानियां पेश कर रहे हैं। हकीकत में इनका कोई वजूद नहीं। इस दर्द को बयां करते हुए कमाल की लाडली बेटी जार-जार रो पड़ी, गला सूखने पर आवाज भी भर्रा गई।
बगल में बैठे मामू (मोहम्मद अली हैदर) के हाथ पानी के घूंट से गला तर करने के कुछ क्षण बाद बोलीं- मेरे बाबा अजीम शख्सियत थे, चंद हाथों ने सस्ती शोहरत के लिए उनको विलेन बनाकर पाकीजा मुहब्बत की उल्टी कहानी लिख डाली। अब अपने पेशे की कामयाबी के लिए पाकीजा मुहब्बत में बेबुनियाद तड़का लगाकर उसे परोस रहे हैं। त्योरियां चढ़ाती हुई बोलीं- मुहब्बत को रुसवा करने वालों को जवाब देने के लिए उनके पास एक या दो नहीं, बल्कि कच्ची पेंसिल और स्याही से दोनों के हाथ से लिखे छोटी मां व बाबा के पांच सौ से ज्यादा खत हैं, जिनके मंजर-ए-आम पर आने पर सबकी जुबान बंद हो जाएंगी, लेकिन फिर कहा कि.. मरते दम तक ऐसा नहीं करूंगी, मौत का एहसास होने से पहले ही इन खतों को जला दूंगी। नहीं चाहूंगी कि कब्र में दफन रूह को इस इंसानी फितरत और फजीहत का वायस बनना पड़े। कुछ देर की खामोशी को तोड़ती हुई एक शायर के शेर का यह जुमला कि.. आरजू झूठ-झूठ, सच-सच हैं, अच्छा-अच्छा इन्हीं को कहने दो... रुखसारे जहरा के होंठ खामोश हो गए।

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