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चौखुटिया में निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा

उजाला ब्यूरो चौखुटिया (अल्मोड़ा)। Updated Sun, 09 Sep 2018 10:34 PM IST
चौखुटिया में निकाली गई जगन्नाथ रथ यात्रा में उमड़ी भीड़।
चौखुटिया में निकाली गई जगन्नाथ रथ यात्रा में उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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भटकोट के प्रयागेश्वर धाम से भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। रथ यात्रा में तमाम लोग शामिल हुए। कुछ ने घरों और ऊंची इमारतों की छतों से भगवान जगनाथ के दर्शन किए। यात्रा के दौरान पूरा माहौल कृष्णमय हो गया। रथ यात्रा का शुुभारंभ विधायक महेश नेगी ने नारियल तोड़कर किया।
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इस्कान की ओर से आयोजित भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की रथ यात्रा रविवार को भटकोट के प्रयागेश्वर मंदिर से शुरू हुई। यात्रा चांदीखेत और चौखुटिया बाजार से होते हुए करीब चार किलोमीटर चलकर अगनेरी मंदिर पहुंची।

रथ को दो विशाल मोटी रस्सियों से बांधा गया था। जिसे खींचने के लिए दोनों तरफ से लोग कतारबद्ध थे। सभी लोग जय जय जगन्नाथ स्वामी और हरे रामा-हरे कृष्णा जैसे भजन गाते झूम रहे थे। देश-विदेश से आए संतगण हारमोनियम, मृदंग, करताल, झांज और झाली के अलावा घंटे और शंख बजाते चल रहे थे।

इससे पूर्व नारियल फोड़कर यात्रा का शुभारंभ हुआ। अगनेरी में विशाल भंडारे के साथ यात्रा का समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक गोविंद दास ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया।

देश-विदेश से पहुंचे संत 
 यात्रा में स्पेन के गोपाल प्रभु, वृंदावन के विदुर प्रभु, बंगाल के कृष्णसखा और गौरा गुणामणी, मुंबई से सैलेश प्रभु, हरियाणा के जौनी प्रभु और नवन प्रभु, बनारस के अंकित प्रभु, उड़ीसा के सुचित्र प्रभु, हैदराबाद के मलागौड प्रभु, गोविंद दास प्रभु, हेम प्रभु दास आदि शामिल हुए।  

भगवान को परोसा 56 भोग 
चौखुटिया। जगन्नाथ यात्रा शुरू होने से पहले भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा का श्रंगार किया गया। फिर शुद्ध देशी घी से बनाए गए 56 भोग में 101 प्रकार के व्यंजन परोसे गए। जिसमें लेमन चावल, नारियल चावल, जीरा चावल, पालक चावल,  पनीर के दर्जनभर व्यंजन, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, पेठा लड्डू, बेसन केलड्डू, जलेबी, बालूसाई सहित दो दर्जन मीठे पकवान सहित एक सौ एक व्यंजनों का भोग लगाया गया। व्यंजन बनाने की तैयारी तड़के  से ही हो गई थी। जिसमें दर्जनभर लोगों को करीब आठ घंटे का समय लगा।

रस्सा खींचने की होड़
भगवान जगन्नाथ के रथ पर लगे मोटे रस्से को खींचने के लिए लोगों में होड़ मची रही। यात्रा में शामिल भक्तों के अलावा विभिन्न स्थानों पर स्वागत में खड़े लोग भी मूर्तियों का दर्शन करने के साथ ही किसी तरह रस्से को छू लेने को आतुर दिखे। यात्रा का आयोजन पिछले सात सालों से लगातार किया जा रहा है। सबसे पहले 9 अगस्त 2012 को यात्रा निकाली गई थी।  

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