छात्र के ज्ञान के विकास में सहयोगी बनें शिक्षक

Almora Updated Tue, 06 May 2014 05:31 AM IST
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अल्मोड़ा। एसएसजे परिसर के शिक्षा संकाय की ओर से हुई कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि आज समाज को ऐसे शिक्षकों की आवश्यकता है जो छात्र के ज्ञान के विकास में सहयोगी की भूमिका निभा सकें। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था इस प्रकार के शिक्षक तैयार करने में असमर्थ है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यालयी शिक्षा के स्वरूप और मान्यताओं में आए परिवर्तनों के अनुरूप शिक्षक शिक्षा में भी परिवर्तन की आवश्यकता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा शिक्षक शिक्षा के पाठ्यक्रम को नवीनीकृत करने के लिए अध्यापक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2010 का निर्माण किया है। इसके आधार पर बीएड और एमएड के पाठ्यक्रम का नवीनीकरण किया जाना है।
डा. मीना मनराल ने बताया कि नवीन पाठ्यक्रम को शिक्षा का आधार, पाठ्यक्रम और शिक्षण शास्त्र, विद्यालय इंटर्नशिप क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा। डा. ममता असवाल ने पाठ्यक्रम के अंतरण और प्रशिक्षु शिक्षकों के मूल्यांकन की प्रक्रिया पर प्रस्तुतीकरण दिया। डा. भास्कर चौधरी ने पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए ब्लू प्रिंट प्रस्तुत किया। अध्यक्षता करते हुए संकाय के डीन और विभागाध्यक्ष प्रो. नवीन ढौंडियाल ने आभार जताया। इस मौके पर प्रो. अमिता शुक्ला, प्रो. विजयारानी ढौंडियाल, प्रो. भीमा मनराल, प्रो. जीएस नयाल, डा. रिजवाना सिद्दीकी, प्रो. डीएस बिष्ट, डा. नीलम कुमारी आदि मौजूद थे।
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