कांग्रेस हरीश रावत, भाजपा मोदी के नाम पर मांग रही वोट

Almora Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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अल्मोड़ा। मतदान के अब सिर्फ दो दिन शेष हैं और प्रचार सोमवार शाम से थम रहा है, पर अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र में तस्वीर साफ नहीं हुई है। इस सीट पर इस बार भी मुख्य मुकाबला कांग्रेस-भाजपा के बीच ही माना जा रहा है। कांग्रेस हरीश रावत को सीएम के तौर पर मजबूत बनाने और भाजपा मोदी को पीएम बनाने के लिए वोट मांग रही है। भाजपा के पीएम इन वेटिंग नरेंद्र मोदी, लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और कांग्रेस से राहुल गांधी रैलियों को संबोधित कर चुके हैं। दूसरी तरफ सीएम हरीश रावत ने संसदीय क्षेत्र के कई हिस्सों में ताबड़तोड़ सभाएं की हैं। दोनों दलों ने पूरी ताकत झोंक रखी है और मुकाबला कांटे का माना जा रहा है।
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अल्मोड़ा सीट में कांग्रेस के वर्तमान सांसद प्रदीप टम्टा, भाजपा से अजय टम्टा के अलावा बसपा, भाकपा माले, आप, सपा, उक्रांद, उपपा समेत कुल नौ प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। प्रदीप टम्टा और अजय टम्टा 2009 के लोकसभा चुनाव में भी आमने-सामने रहे थे। 6850 वोट से प्रदीप को विजय मिली थी। दोनों में टक्कर इस बार भी सीधी है। सीएम हरीश रावत ने इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ा है और वह चारों जिलों में अब तक करीब डेढ़ दर्जन सभाएं कर चुके हैं। जबकि भाजपा से बॉलीवुड अभिनेता शक्ति कपूर और कांग्रेस से अभिनेत्री अमिषा पटेल ने भी वोटरों को खींचने की कोशिश की है।
लोकसभा क्षेत्र में कुल 14 विधानसभा सीटें हैं। इनमें आठ कांग्रेस और छह भाजपा के पास हैं। सभी विधायक अपने क्षेत्रों में अपनी पार्टी की साख बचाने के लिए काम कर रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि सीएम हरीश रावत के दम पर पार्टी काफी मजबूत स्थिति में है वहीं भाजपा समर्थकों का कहना है कि मतदाता इस बार मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए भाजपा के पक्ष में वोट डालेंगे। इस सबके बीच मतदाताओं का रुख अभी तक साफ नहीं हुआ है।
अधिकांश गांवों में संपर्क नहीं कर सके प्रत्याशी
अल्मोड़ा। लोकसभा क्षेत्र अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत चार जिलों में फैला हुआ है। भौगोलिक दृष्टि से यह संसदीय क्षेत्र इतना विशाल और दुर्गम है कि प्रत्याशियों के लिए हर गांव में पहुंचकर जनसंपर्क करना असंभव रहता है। कोई भी प्रत्याशी पैदल वाले गांवों में जाकर जन संपर्क नहीं कर सका है। भारी तामझाम और संसाधनों के बावजूद भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशी चारों जिलों में सिर्फ सड़कों के आसपास के गांवों में ही प्रचार कर सके। हालांकि अपवाद के तौर पर कुछ इलाकों में सड़क से कुछ दूरी पर स्थित बड़े गांवों में वह पैदल जाकर लोगों से मिल लिए। नगर क्षेत्रों में भी सांसद प्रत्याशियों के लिए हर मोहल्ले में जाना संभव नहीं हो सका।
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