भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली

Almora Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
चौखुटिया। चौखुटिया में भटकोट के प्रयागेश्वर धाम से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। समूची चौखुटिया घाटी रथ यात्रा में शामिल होने के लिए उमड़ पड़ी। सैकड़ों लोगों ने घरों और ऊंची इमारतों की छतों तथा अन्य स्थानों से भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। यात्रा में शामिल लोग भजन, कीर्तन गाते चल रहे थे। जिससे समूचा वातावरण भक्तिपूर्ण हो गया। अगनेरी मंदिर में विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस्कान के तत्वावधान में पहली बार आयोजित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ यात्रा रविवार को भटकोट के प्रयागेश्वर मंदिर से दोपहर बाद साढे़ तीन बजे शुरू हुई। यात्रा चांदीखेत तथा चौखुटिया बाजार से होते हुए करीब चार किलोमीटर चलकर अगनेरी मंदिर परिसर पहुंची। रथ को दो विशाल रस्सियों के सहारे बांधा गया था। जिसे खींचने के लिए दोनों तरफ से लोग कतारबद्ध थे। रथ के आगे कुछ भक्त बड़ा झाडू़ लिए रास्ता साफ करते बढ़ रहे थे। यात्रा के बीच में ही कुछ देर के लिए मूसलाधर बारिश शुरू हो गई परंतु इसके बावजूद लोग जय जय जगन्नाथ स्वामी तथा हरे रामा हरे कृष्णा जैसे भजन गाते हुए आगे बढ़ते रहे। यात्रा में उड़ीसा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पश्चिम बंगाल से पहुंचे राम खिलाड़ी दास, सुबल दास, गोविंद ब्रहमचारी, परमहंस प्रभु, आनंद वर्धन दास, असीम दास, श्रीनिवास दास, रामानुज दास, बूजेश तनय, विष्णु प्रभु, डा.अनुपम दास, विकास प्रभु, सुबल प्रभु तथा विदुर प्रभु के अलावा ब्लाक प्रमुख मीना कांडपाल सहित क्षेत्र के तमाम जनप्रतिनिधि, गणमान्य लोगों के साथ ही सैकड़ों लोग शामिल हुए। यात्रा शुरू होने से पहले भगवान का श्रृंगार किया गया। फिर शुद्ध देशी घी में बनाए गए 56 व्यंजनों का भोग लगाया गया। इससे पहले अतिथियों और संतों ने नारियल फोड़कर यात्रा का शुभारंभ किया। सुरक्षा व्यवस्था में पुुलिस के जवानों के अलावा जीआईसी के एनसीसी छात्रों का सहयोग रहा।

उत्तराखंड में पहली बार आयोजित हुई यात्रा
चौखुटिया। भटकोट के प्रयागेश्वर मंदिर में रहने वाले तथा इस्कान से जुडे़ गोविंद दास ब्रह्मचारी के प्रयासों से जगन्नाथ यात्रा का आयोजन हुआ। उड़ीसा के पुरी से पहुंचे परमहंस प्रभु ने बताया कि गोविंद दास ब्रह्मचारी ने चौखुटिया में यात्रा के आयोजन का आग्रह किया था। इस पर यहां यात्रा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। उत्तराखंड की यह पहली रथ यात्रा है। उन्होंने बताया कि जगन्नाथ पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में दर्शन की सभी लोगों को अनुमति नहीं है। इसलिए साल में एक बार भगवान जगन्नाथ को रथ यात्रा के माध्यम से मंदिर से बाहर लाकर सभी को दर्शन कराए जाते हैं।

पांच वाद्य यंत्रों का किया प्रयोग
चौखुटिया। जगन्नाथ रथ यात्रा में भजन कीर्तन के दौरान हारमोनियम, मृदंग, करताल, झांज तथा झाली सहित कुल पांच वाद्य यंत्रों के अलावा घंटा तथा शंख का प्रयोग किया गया। जगन्नाथपुरी में बनी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा सुभद्रा की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनाई गई थी। नीम की जिस लकड़ी में शंख, चक्र, गदा तथा पद्म की आकृति उभरी होती है, उसी लकड़ी से मूर्तियां बनाई जाती हैं।

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