बेटियों ने दी मां की चिता को मुखाग्नि

Almora Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
अल्मोड़ा। बेटा और बेटी में अब कोई अंतर नहीं रह गया है। जिन मां-बाप के बेटे नहीं हैं, मृत्यु के समय उनकी बेटियां अब मुखाग्नि देने लगी हैं। हिंदू धर्म में सुधार की जो प्रक्रिया स्वत: चली है यह उसी का हिस्सा है। साल भर पहले कांता सिंह (साह) को जब फेफड़ों की गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया था तो जीते जी उन्होंने अपनी बेटियों के सामने यह इच्छा रख दी थी कि उनकी मौत के बाद अंतिम संस्कार बेटियों के हाथ ही हो और उनकी चिता को मुखाग्नि भी बेटियां ही दें। ऐसा ही हुआ, सामाजिक रुढ़िवादी विचारों को दरकिनार करते हुए शनिवार को हिमानी, शिवानी ने ही मां की चिता को अग्नि दी।
रानीखेत छावनी परिषद की पूर्व कार्यालय अधीक्षक कांता सिंह का शुक्रवार शाम को निधन हो गया था। 59 वर्षीय कांता ने साल भर पहले ही बीमारी के चलते वीआरएस भी ले लिया था। वर्तमान में वह अल्मोड़ा कैंट में अपनी बेटी हिमानी सिंह के साथ रह रही थीं। हिमानी कैंट में ही कार्यरत हैं। छोटी बेटी शिवानी सिंह दिल्ली में एअर होस्टेस की ट्रेनिंग कर रही हैं। 24 वर्षीय शिवानी और 26 वर्षीय हिमानी सिंह ने मां की मृत्यु के बाद उनकी चिता को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया।
शनिवार को विश्वनाथ घाट में कांता सिंह का अंतिम संस्कार हुआ। ताऊजी केएल साह के साथ दोनों बेटियों ने मां की चिता को अग्नि दी। अंतिम संस्कार की बाकी रस्में नौवें दिन हरिद्वार में होंगी। कांता सिंह की अंतिम यात्रा में जगमोहन साह, बृजेश साह, दर्शन साह, केएल साह, विजय साह, दीप चंद्र साह समेत तमाम लोग मौजूद थे।

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