बागियों की वापसी का होगा विरोध

Almora Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
अल्मोड़ा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल के सामने शुक्रवार को पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश में बागियों की वापसी संबंधी खबरों पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष से साफ कह दिया कि बागियों को अगर पार्टी में दोबारा लिया गया तो इसका कतई समर्थन नहीं किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष ने फिलहाल ऐसी किसी भी संभावना से इंकार किया। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय में कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष हल्द्वानी वापसी के दौरान कुछ देर के लिए अल्मोड़ा में रुके। करीब दस मिनट तक प्रदेश अध्यक्ष की कार्यकर्ताओं से बात हुई। कार्यकर्ताओं का कहना था कि प्रदेश अध्यक्ष के हवाले से पिछले दिनों बागियों को पार्टी में लिए जाने संबंधी बातें सामने आई थीं। जिला संयोजक ललित लटवाल ने कहा कि 2012 के विधानसभा चुनावों में जिन लोगों ने भितरघात किया था, उनके लिए पार्टी में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों का कड़ा विरोध किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष चुफाल ने कहा कि फिलहाल ऐसे लोगों को पार्टी में लेने की कोई बात नहीं है। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में कार्यकर्ताओं की भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। उनसे मिलने वालों में पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान, गोविंद पिलख्वाल, गंगा बिष्ट, लता बोरा, अजीत कार्की, अमिता जीना, राजीव गुरुरानी, रवि रौतेला, कैलाश गुरुरानी, संजय अग्रवाल, एसएस पाटनी, अजय वर्मा, खजान मिश्रा, धमेंद्र बिष्ट, मोतीलाल वर्मा, नरेंद्र मोहन तिवारी, नंदन मेहता, अंकुर कांडपाल, कमल बिष्ट, वैभव कांडपाल, कृष्णा कांडपाल, संजय कनवाल, जगत कनवाल, मनोज वर्मा, डा. एनएस भंडारी, सज्जन लाल, दर्शन रावत, नर्मदा तिवारी, राजेंद्र बिष्ट, भुवन कुमार राठौर, बहादुर कनवाल, किशन बिष्ट आदि शामिल थे।


पदाधिकारी नहीं चाहते कोई वापस हो
अल्मोड़ा। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश इकाई में इन दिनों बागियों की वापसी को लेकर चल रही राजनीति पार्टी नेताओं के लिए न निगले, न उगले बने की स्थिति पैदा कर रही है। एक तरफ ऐसे बागी हैं जिनका अपना खासा वजूद है और पार्टी को भी जिनकी जरूरत। उनके सामने ऐसे विरोधी हैं जिन्हें बागियों को आता देख अपना वजूद गड़बड़ाता दिख रहा है। विधानसभा चुनावों में बागियों ने भाजपा का गणित जिस तरह से गड़बड़ाया है उससे हाईकमान उनकी अहमियत तो समझ रहा है मगर वर्तमान पदाधिकारियों का विरोध उसकी मुसीबत बना हुआ है।
जिन बागियों को निकाला गया उन्होंने विधानसभा चुनावों में निर्दलीय चुनाव लड़कर पार्टी को अपनी ताकत दिखा भी दी थी। अल्मोड़ा में पूर्व विधायक कैलाश शर्मा ने पार्टी टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ा और व्यक्तिगत छवि के आधार पर 6582 वोट लाए। भाजपा दूसरे नंबर पर रही और जीत का अंतर था केवल 1181। बागियों के साथ जाने वाले पदाधिकारी भी खासे संख्या में थे जिन्हें भाजपा संगठन ने बाद में बाहर का रास्ता दिखाया। प्रदेश में कई स्थानों पर ऐसे ही बागियों की बदौलत भाजपा के हाथों में सत्ता आते-आते रह गई। भाजपा हाईकमान के सामने अब 2014 मेें लोक सभा चुनाव दिख रहा है। इसीलिए वह प्रदेश में कई बड़े बागी नेताओं के संपर्क में है। देहरादून में मुन्ना सिंह चौहान के आने की चर्चा है तो और भी कई ऐसे लोग लाइन में हैं। भाजपा ही अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बागियों की वापसी उन क्षेत्रों में अपना वजूद तलाश रहे लोगों के लिए मुसीबत बन रही है।

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