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लाग हर्याल, लाग बग्वाल जी रया जागि रया....

Almora Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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अल्मोड़ा। हरियाली और सुख समृद्धि का प्रतीक कुमाऊं का प्रसिद्ध हरेला पर्व कल सोमवार 16 जुलाई को मनाया जाएगा। हरेला प्रकृति से जुड़ा पर्व है। इस पर्व की तैयारियां दस दिन पहले शुरू हो जाती हैं। सभी घरों में लोगों ने दस दिन पहले से ही हरेला बो रखा है। हरेले पर्व पर इसे धार्मिक विधि विधान के साथ काटकर भगवान को अर्पित करने के बाद शिरोधार्य किया जाता है।
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हरेला पर्व सावन मास की पहली तिथि (संक्रांति) को मनाया जाता है। इस पर्व से दस दिन पहले सभी घरों में धान, गेहूं, मक्का, जौ, सरसों पांच अथवा सात प्रकार के अनाज को मिलाकर दो छोटी-छोटी टोकरियों में बोया जाता है। खास बात यह है कि हरेले को घर के भीतर प्रकाश रहित स्थान पर रखा जाता है। इस कारण हरेले का रंग पीला हो जाता है। पीले रंग को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि हरेला जितना अच्छा उगता है उस वर्ष फसल भी उतनी ही अच्छी होगी। कल सोमवार 16 जुलाई को हरेला पर्व की सुबह पूजा-अर्चना के बाद हरेला काटकर भगवान को अर्पित कर शिरोधार्य किया जाएगा। लोग हरेले को ईष्टदेव तथा अन्य मंदिरों में भी अर्पित करते हैं। इस मौके पर घरों में विशेष पकवान भी बनाए जाते हैं।

हरेला शिरोधार्य करते समय कुमाऊंनी में विशेष आशीष ‘लाग हर्याल, लाग बग्वाल जी रया जागि रया, यो दिन बार भेटणे रया’ आशीष दी जाती है। परंपरा के तहत नव विवाहिताएं हरेले का पहला पर्व मायके में ही मनाती हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में नवविवाहिता बेटियों को हरेले का बेसब्री से इंतजार रहता है।

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