मनोज सिन्हा के बहाने, भाजपा ने साधे कई निशाने

शशांक मिश्र, वाराणसी Updated Fri, 07 Aug 2020 05:33 AM IST
विज्ञापन
पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा (फाइल फोटो)।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
बीएचयू के छात्रसंघ अध्यक्ष से केंद्रीय मंत्री तक का सफर पूरा करने वाले मनोज सिन्हा को जम्मू-कश्मीर का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। बिहार चुनाव से ठीक पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री को बडे़ पद (उपराज्यपाल) से नवाज कर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।
विज्ञापन

पूर्वांचल से रोटी-बेटी के रिश्ते से जुड़े बिहार के भूमिहार समाज को सीधा संदेश देने की कोशिश की गई है। इसके अलावा इस निर्णय को वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए पूर्वांचल में जमीन मजबूत करने की कवायद से जोड़ा जा रहा है। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल सिन्हा को जम्मू कश्मीर की नई जिम्मेदारी देकर पार्टी ने यूपी के सियासी समीकरण भी साधे हैं।
तीन दशक से राजनीति में सक्रिय पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा की पूर्वांचल के हर वर्ग में स्वीकार्यता है। उत्तर भारत की शिक्षा के बड़े केंद्र बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे मनोज सिन्हा पूर्वांचल के साथ ही बिहार की सियासत में सक्रिय रहे हैं। छात्र राजनीति से सक्रियता के कारण वर्षों से बिहार की सियासत में भी दखल रखते रहे हैं।

जानकारों की मानें तो बिहार से जुड़े केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे और मनोज सिन्हा बीएचयू में समकालीन रहे हैं। उसी दौर से बिहार के विश्वविद्यालयों में मनोज सिन्हा को बुलाया जाता रहा था।

बतौर दूरसंचार और रेल राज्यमंत्री के रूप में वर्ष 2014 से 2019 तक का कार्यकाल बहुत ही शानदार रहा था। इस दौरान उन्होंने बिहार को पूर्वांचल सहित अन्य राज्यों से जोड़ने के लिए कई ट्रेनों की सौगात दी थी।

मोकामा की बंद पड़ी फैक्ट्री को खोलने की बात हो या मेमू ट्रेनों के संचालन को लेकर निर्णय, बतौर रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

पूर्वांचल और बिहार के कई जिलों में निर्णायक बिरादरी है भूमिहार
पूर्वांचल और बिहार के कई जिलों में भूमिहार बिरादरी निर्णायक भूमिका में हैं। वर्ष 2019 में गठबंधन प्रत्याशी से लोकसभा चुनाव हारने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि मनोज सिन्हा को राज्यसभा भेजा जाएगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी से चुनाव में शिकस्त के बाद भी मंत्री पद से नवाजे जाने से मनोज सिन्हा को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। मगर, बिहार चुनाव से ठीक पहले पूर्वांचल के बड़े चेहरे को जम्मू कश्मीर जैसे राज्य का उप राज्यपाल बनाकर बड़ी सौगात दी है।

मनोज सिन्हा तीन दशक से राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्हें कई बार हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2014 में तीसरी बार सांसद बनने के बाद उन्होंने पूर्वांचल और बिहार को कई सौगात दी थीं। बावजूद इसके वर्ष 2019 में उनकी हार के बाद से ही उन्हें समर्थक आशान्वित थे।

Trending Video

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X
  • Downloads

Follow Us