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सौ साल पुरानी मां अन्नपूर्णा की मूर्ति आएगी काशी, अवैध तरीके से पहुंची थी कनाडा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 22 Nov 2020 12:04 AM IST
मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा और, काशी में मंदिर के महंत।
मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा और, काशी में मंदिर के महंत। - फोटो : अमर उजाला
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सौ साल पहले चुरा कर कनाडा ले जाई गई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति जल्द काशी आएगी। कनाडा सरकार ने भारत के उच्चायुक्त को 19 नवंबर को मूर्ति सौंप दी है। मूर्ति कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ रेजिना में मिली है। मूर्ति के एक हाथ में खीर और दूसरे हाथ में अन्न मौजूद है।



19 नवंबर से शुरू हुए वर्ल्ड हेरिटेज सप्ताह के दौरान भारतीय  कलाकार दिव्या मेहरा की नजर मूर्ति पर पड़ी और मामला उठाया। सक्रियता के बाद उजागर हुआ कि मैकेंजी ने सौ साल पहले भारत की यात्रा की थी और उसी समय वह वाराणसी भी आए थे।  


माना जा रहा है कि इस मूर्ति को अन्नपूर्णा मंदिर से चोरी कर पहुंचाया गया था। मूर्ति अब भारत लाई जा रही है। मैकेंजी आर्ट गैलरी में रेजिना यूनिवर्सिटी के संग्रह से मिली मां अन्नपूर्णा की मूर्ति को अंतरिम राष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के उप-कुलपति थॉमस चेस ने कनाडा में भारत के उच्चायुक्त अजय बिसारिया को एक वर्चुअल समारोह में 19 नवंबर को आधिकारिक रूप से इस मूर्ति की जानकारी दी। इस समारोह में मैकेंजी आर्ट गैलरी, ग्लोबल अफेयर्स कनाडा और कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।


अब यह मूर्ति भारत में वापस आने के साथ ही उम्मीद है कि अन्नपूर्णा दरबार का सौ साल बाद एक अभिन्न हिस्सा भी बन जाएगी। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि मूर्ति जब भारत आएगी, उसके बाद आगे की प्रक्रिया पूर्ण होगी। वैसे अभी कुछ दिन पहले कर्नाटक से चोरी हुई मूर्तियां जब भारत आईं तो उन्हें मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार को सौंप दिया। इससे उम्मीद है कि यह मूर्ति काशी की धरोहर है और काशी आएगी।



 

1936 में मैकेंजी ने करवाई थी मूर्ति की वसीयत
भारतीय कलाकार दिव्या मेहरा ने गैलरी के स्थायी संग्रह में पाया कि इस मूर्ति की वसीयत 1936 में मैकेंजी ने करवाई थी और गैलरी के संग्रह में जोड़ा गया था। दिव्या ने मुद्दा उठाया और कहा कि यह अवैध रूप से कनाडा में लाई गई है। शोध में पता चला कि मैकेंजी ने 1913 में भारत यात्रा की थी। यह मूर्ति उसी के बाद यहां से कनाडा पहुंची। मां अन्नपूर्णा अपने एक हाथ में खीर और दूसरे में चम्मच लिए हुए हैं।
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