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हादसे के बाद भी नहीं चेता रेलवे प्रशासन

Varanasi Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। इलाहाबाद की घटना के बाद भी रेलवे प्रशासन नहीं चेता। रेलवे स्टेशनों के अधिकारियों में कोआर्डिनेशन के अभाव का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ा। हद तो तब हो गई, जब अधिकारियों से ज्यादा जानकारी कैंट स्टेशन पर कुलियों के पास थी। कौन गाड़ी कहां जाएगी, इसकी सही जानकारी यात्रियों को कुली दे रहे थे।
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गरीब नवाज एक्सप्रेेस सोमवार को कछवा रोड स्टेशन पर खड़ी थी। कंट्रोल रूम से बताया गया कि इलाहाबाद तक इस ट्रेन का पता नहीं चल रहा है। बाद में सही जानकारी मिली। इसी तरह, दूसरा मामला महानगरी के इलाहाबाद से होकर जाने का था। अधिकारी बोले कि यह इलाहाबाद होकर जाएगी लेकिन कुलियों ने बताया कि यह ट्रेन इलाहाबाद न जाकर छिवकी से ही घूम जाएगी। यही नहीं, सोमवार को कैंट स्टेशन पर मेला स्पेशल कब आएगी और कब जाएगी, इसकी जानकारी कोई नहीं दे पा रहा था। मेला स्पेशल ट्रेनों में पानी न होने से गंदगी फैली हुई थी। स्टेशन पर सुबह आठ बजे जबरदस्त भीड़ रही। दोपहर बाद लगभग एक बजे भीड़ थोड़ी कम हुई लेकिन शाम से फिर भीड़ बढ़ गई। मेला स्पेशल ट्रेनों पर लगी नाम पट्टिका को हटा दिया गया था। यात्री इस दुविधा में थे कि ट्रेन कहां जाएगी। स्टेशन पर इसकी जानकारी देने वाला भी कोई नहीं था। ट्रेन में बैठे यात्रियों को जब यह जानकारी मिलती कि ट्रेन उनके गंतव्य को नहीं जाएगी तो वे हड़बड़ी में उतरने लगते। दादर-गोरखपुर एक्सप्रेस के प्लेटफार्म नंबर पांच पर आने की घोषणा कर दी गई थी। लोग प्लेटफार्म पर पहुंचने लगे। थोड़ी देर बाद घोषणा की गई कि मंड़ुवाडीह-गोरखपुर पैसेंजर प्लेटफार्म एक पर आ रही है। यात्रियों में अफरातफरी मच गई। लोग प्लेटफार्म एक की ओर भागने लगे। ट्रेन में चढ़ने के लिए यात्रियों में मारपीट की स्थिति बन रही थी। कोई खिड़की के रास्ते घुस रहा था तो कई इंजन पर चढ़ने के लिए आतुर था। दूसरी ओर, कैंट स्टेशन पर मेडिकल की सुविधा नहीं थी। स्टेशन पर एंबुलेंस और फायर बिग्रेड की गाड़ी भी नहीं थी।


एक घंटे की यात्रा पांच घंटे में
वाराणसी। ज्ञानपुर से कैंट स्टेशन तक आने में सुपरफास्ट ट्रेनों को पांच घंटे लग जा रहे हैं, जबकि यह दूरी एक घंटे की है। मेला स्पेशल ट्रेनें इलाहाबाद से वाराणसी आने में सात से आठ घंटे लगा रही हैं। विभूति 17 घंटे, शिवगंगा एक्सप्रेस सवा नौ घंटे, स्वतंत्रता सेनानी आठ घंटे, महानगरी 6 घंटे, पवन साढे़ तीन घंटे विलंब से कैंट स्टेशन पर पहुंची। कैंट से शिवगंगा लगभग सवा तीन घंटे विलंब से रवाना हुई। इलाहाबाद से आने वाली लगभग सभी ट्रेनें विलंब से चल रही हैं।

साफ सफाई की व्यवस्था नहीं
वाराणसी। कैंट पर साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं थी। चारो ओर गंदगी फैली हुई थी। सोमवार को लगभग साढ़े तीन लाख लोगों की भीड़ थी। प्लेटफार्म के बाहर पेयजल की व्यवस्था न होने से यात्री परेशान रहे।

तीन दिन से ढूंढ रहा पत्नी को
नेपाल का बचाई साह (60) अपनी पत्नी रामप्यारी को पिछले तीन दिन से ढूंढ रहा है। विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के दौरान उसका साथ छूट गया। सोमवार को कैंट स्टेशन पर वह अपनी को ढूंढ रहा था। जो मिलता, उसी के पत्नी के बारे में पूछता। कैंट स्टेशन पर लगभग 50 लोग जो बिछड़ गए थे, वे मिलने के बाद रो रहे थे। कोलकाता के कानू साह की पत्नी बनबसिया भी कैंट स्टेशन पर बिछड़ गई थी, बाद में मिल गई।

कहां गई मेरी रन्नो...
बलिया का रहने वाला एक व्यक्ति अपनी पत्नी को जीआरपी बूथ के सामने बैठाकर सामान लाने चला गया। वापस आया तो वहां पत्नी को न देख दहाड़ मारकर रोने लगा। कहने लगा, मैं लुट गया, बर्बाद हो गया।’ जीआरपी वाले ने उससे पूछा कि क्या हुआ तो उसने अपनी पत्नी का रंग रूप और पहनावा के बारे में बताने लगा। नाम रन्नो बताकर फिर जोर-जोर से रोने लगा। पहले जीआरपी वालों ने उसे शांत रहने को कहा। फिर उससे कहा गया कि आंख खोलिए, देखिए सामने कौन है। पत्नी को देखते ही उसे गले लगाकर वह फिर रोने लगा।

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