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दो मिनट में हो जाता है पासपोर्ट का कोटा फुल

Varanasi Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। पासपोर्ट के ऑनलाइन पंजीकरण में जबरदस्त खेल चल रहा है। शाम को महज चार बजे के करीब दो मिनट के लिए साइट खोली जाती है। इस दौरान अपलोडिंग की मारामारी मचती है और सर्वर डाउन हो जाता है। कोई भी अपने कंप्यूटर से पंजीकरण नहीं कर पाता। इस स्थिति का फायदा दलाल और साइबर कैफे वाले उठाते हैं। उन्हें विशेष तकनीक मालूम है जिससे वे पंजीकरण कराकर एप्वाइंटमेंट ले लेते हैं। नियमानुसार एक मेल आईडी से अधिकतम चार अप्वाइंटमेंट लिए जा सकते हैं लेकिन कैफे वाले दर्जनों आईडी के माध्यम से रोजाना 40-50 पंजीकरण करा रहे हैं। हालांकि पासपोर्ट का काम करने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि कुछ लोग साइट हैक करके यह काम कर रहे हैं।
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पासपोर्ट चाहने की वालों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था है। बनारस केंद्र से रोजाना 500 पंजीकरण कराए जा सकते हैं। इसके लिए सेवा प्रदाता कंपनी की साइट दिनभर नहीं खुलती। रेलवे के तत्काल टिकट की तरह शाम को चार बजे साइट खुलती है और दो-तीन मिनट में ही बंद कर दी जाती है। इतने में आवेदन अपलोड होने पर अप्वाइंटमेंट मिल जाता है।

निर्धारित तिथि पर आवेदक को दस्तावेज के साथ दफ्तर में आना पड़ता है। उसके बाद पुलिस और एलआईयू की जांच होती है और पासपोर्ट भेज दिया जाता है। साइट खुलने पर सर्वर इतना डाउन होता है कि गाजीपुर, जौनपुर, बलिया आदि जिलों के आवेदन अपलोड ही नहीं हो पाते। इसका फायदा साइबर ढाबा संचालक और दलाल उठाते हैं। ढाबे वाले दो सौ रुपये लेते हैं जबकि दलाल दस्तावेज की जांच तक फाइनल कराने के नाम पर डेढ़ से दो हजार रुपये तक वसूल लेते हैं।
बलिया के बारहवीं के छात्र पवन कुमार ने बताया कि उन्होंने दो सौ रुपये देकर साइबर कैफे के माध्यम से अप्वाइंटमेंट लिया था। क्षेत्र में खुले दो दर्जन साइबर ढाबे ही नहीं बल्कि 50 से ज्यादा दलाल भी सक्रिय हैं। ऐसे ही एक दलाल रोहित ने अप्वाइंटमेंट की तकनीक के बारे में बताया कि वे लोग दूसरे शहरों और देशों से पंजीकरण कराते हैं।
सहायक पासपोर्ट अधिकारी बुद्धि सागर के मुताबिक पंजीकरण का काम टाटा कंसल्टेंसी का है। उसे अप्वाइंटमेंट का कोटा और पंजीकरण का समय बढ़ाना चाहिए। वे ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं, उनके अधिकारी ही बताएंगे। उधर, सेवा प्रदाता कंपनी का कोई अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

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