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दो मासूम बच्चों के साथ महिला ने दी जान

Varanasi Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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सेवापुरी। ससुराल वालों की प्रताड़ना से आजिज सुनीता (25) नामक महिला ने अपने दो बच्चों नंदनी (3) और हिमांशु उर्फ अमन (2) के साथ सोमवार की सुबह आग लगाकर जान दे दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर तीनों का शव बाहर निकाला। यह हृदय विदारक घटना जंसा थाना क्षेत्र के दयापुर तेंदुई की है। पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि तीन दिन के अंदर सास और पति ने सुनीता की दो बार पिटाई की थी। पुलिस ने उसके पति को हिरासत में ले लिया है। सुनीता के पिता ने पति और सास के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।
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दयापुर तेंदुई निवासी बसंत गुप्ता रोज की तरह सोमवार को भी मसाले की फेरी लगाने चला गया। घर में उसकी पत्नी सुनीता दो बच्चों के साथ मौजूद थी। मकान के सामने उसकी सास श्यामा देवी और जेठानी मालती मोती की माला गूंथ रही थी। इस दौरान सुनीता ने घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वह अपने दोनों बच्चों नंदनी और हिमांशु को लेकर कमरे में चली गई। उसने दूसरे कमरे में रखा मिट्टी के तेल से भरा गैलन उठाया। कमरा अंदर से बंद करने के बाद उसने मिट्टी का तेल पूरे कमरे में छिड़ककर आग लगा दी। कमरे से अचानक धुंआ उठते देख सास और जेठानी ने शोर मचाया तो गांव के लोग जुट गए। ग्रामीणों ने छत के रास्ते नीचे उतरकर मुख्य दरवाजा खोला लेकिन कोई भी धधकती आग के बीच कमरे में बच्चों और महिला को बचाने का साहस न कर सका। एक घंटे बाद थानाध्यक्ष सुरेंद्र पांडेय मौके पर पहुंचे तो पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। तीनों के प्राण निकल चुके थे।

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार भदोही के कोइरवना इनारे निवासी रामरतन गुप्ता की पुत्री सुनीता की शादी 14 अप्रैल 2008 को बसंत गुप्ता से हुई थी। वह अपने पति के चरित्र पर शक करती थी। इसी को लेकर हुए विवाद में पति ने तीन दिन पहले उसकी पिटाई कर दी थी। रविवार को फिर विवाद होने पर सास ने भी बहू को बेरहमी से पीटा था। उसके मुंह से खून बहने लगा था। इसी के चलते रविवार को भी उसने जान देने का प्रयास किया था, लेकिन परिजनों ने उसे रोक लिया था। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सुनीता के पिता ने आरोप लगाया है कि दहेज में बाइक न देने पर ससुरालियों ने उनकी बेटी को मार डाला। पुलिस जांच में जुटी है।
इनसेट
दरवाजा तोड़कर बचाई जा सकती थी जान!
सेवापुरी। दयापुर तेंदुई स्थित घर में सोमवार की सुबह जब सुनीता ने आग लगाई उस समय चीख पुकार सुनकर पड़ोसी छत के रास्ते अंदर तो घुसे लेकिन किसी ने दरवाजा तोड़ने की हिम्मत नहीं दिखाई। मौके पर लोगों में यह चर्चा थी कि यदि पड़ोसी दरवाजा तोड़ देते तो उन्हें बचाया जा सकता था।
पता चला है कि सुनीता के भाई रामबली और श्यामबली गुप्ता खिचड़ी पर अपनी बहन से मिलने आए थे। वे दोनों बच्चों को अपने साथ ले जाना चाह रहे थे, लेकिन सुनीता की सास ने बच्चों को जाने से रोक दिया। आरोप है कि सास हमेशा सुनीता को मायके जाने से रोक देती थी। इधर, एक साथ कई परेशानियों से घिरी सुनीता ने अंतत: जान देने का फैसला कर लिया। वह इतनी तंग आ चुकी थी कि उसे बच्चों की भी परवाह नहीं थी।

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